कोटा विश्वविद्यालय में वंदे मातरम् शताब्दी और विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में राष्ट्र चेतना का अनूठा संदेश दिया गया है।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर भव्य आयोजन
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। कोटा विश्वविद्यालय के नागार्जुन भवन सभागार में विश्वविद्यालय भेषजीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में एक गरिमामयी एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलगुरु महोदय प्रो. बी. पी. सारस्वत जी की प्रेरणा और कुशल मार्गदर्शन में राष्ट्र चेतना के भव्य माहौल में संपन्न हुआ। इस संयुक्त आयोजन के मुख्य रूप से दो प्रमुख आयाम रहे, जिसमें पहला आयाम वंदे मातरम् के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित नमामि भारतम् एक स्वर वंदे मातरम् रहा, तथा दूसरा आयाम विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर सशक्त फार्मासिस्ट और स्वस्थ भविष्य के संकल्प से जुड़ा हुआ था। इस भव्य आयोजन ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और गणमान्य अतिथियों के दिलों में राष्ट्रभक्ति की एक नई और अनूठी अलख जगा दी जिससे पूरा परिसर गूंज उठा।
कार्यक्रम की संयोजक प्रोफेसर रीना दाधीच ने अपने स्वागत उद्बोधन में सम्पूर्ण भारत में एक साथ हो रहे इस राष्ट्रव्यापी आयोजन के मुख्य उद्देश्य पर बहुत ही विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान, नई दिल्ली के इस राष्ट्रीय अभियान के तहत चित्तौड़ प्रांत की पहल नमामि भारतम् अभियान के अंतर्गत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में चल रहे इस अनुष्ठान की कड़ी में कोटा विश्वविद्यालय में ठीक 11 बजे समवेत स्वरों में वंदे मातरम् का भव्य सामूहिक गान किया गया। इस ऐतिहासिक सामूहिक गान को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड एवं इंडियन रिकॉर्ड बुक द्वारा आधिकारिक रूप से प्रमाणित भी करवाया जाएगा, जो पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए बेहद गर्व और सम्मान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण रहा।
फार्मेसी विभाग के पाठ्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर भवानी सिंह ने इस अवसर पर अपने प्रेरणादायक संबोधन में विभाग की अब तक की प्रगति और इसके सुचारू संचालन पर बहुत ही व्यापक प्रकाश डाला। उन्होंने सभी उपस्थित फार्मासिस्ट विद्यार्थियों को पूरी फार्मेसी के कार्य को अत्यधिक कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और सेवाभाव से निभाने का एक दृढ़ संकल्प भी दिलाया। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में फार्मासिस्टों की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान होती है, इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई के दौरान ही तकनीकी दक्षता के साथ साथ मानवीय मूल्यों को भी अपने जीवन का मुख्य आधार बनाना चाहिए ताकि वे भविष्य में समाज को एक स्वस्थ और बेहतर दिशा प्रदान कर सकें।
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिन्दू परिषद, चित्तौड़ प्रांत के श्री युधिष्ठिर सिंह हाड़ा ने अपना अत्यंत प्रेरक और मुख्य वक्तव्य दिया, जिनके ओजस्वी विचारों ने सभागार में बैठे सभी लोगों के भीतर राष्ट्र प्रेम और कर्तव्य बोध की भावना को पूरी तरह से प्रज्वलित कर दिया। उन्होंने वंदे मातरम् के क्रमिक ऐतिहासिक विकास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह राष्ट्रगीत हमारी महान मातृभूमि के प्रति सम्मान और अटूट राष्ट्रभक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक है। इसे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रगीत बताते हुए कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों में देशभक्ति की भावना जगाई थी। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें और अनुशासन को अपनाएं।
इस गरिमामयी समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वामी विवेकानंद शिक्षा समूह, भवानीमंडी के समन्वयक एवं सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय श्री हिमांशु चतुर्वेदी ने अपने बहुआयामी विचारों से सभी को अनुगृहीत किया। उन्होंने विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य सेवा में फार्मासिस्ट के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने ऋषि सुषेण एवं हनुमान जी के प्रसंग से संजीवनी ला कर देने वाले कर्मठ फार्मासिस्ट बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम के सह संयोजक एवं भौतिक शास्त्र विभाग के प्रोफेसर नारायण हेडा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें इस महाकुंभ को सफल बनाने वाले सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोगियों, शिक्षकों और ऊर्जावान विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया। प्रभावी मंच संचालन से युवराज आशावत ने सभी को प्रभावित किया।
इस भव्य आयोजन के सफल संचालन में फार्मेसी विभाग की विभागाध्यक्ष सरिता सोलंकी, भानु प्रताप सिंह, एन.एस.एस. के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्वेता व्यास एवं डॉ. आशीष आसोपा के साथ ही फार्मेसी संकाय के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। अंत में राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत के साथ इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन का समापन हुआ जिसमें वंदे मातरम् का गूंजता संदेश भी शामिल रहा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कोटा विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्र चेतना और फार्मासिस्ट दिवस से जुड़े विशेष विवरण इस रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।