कोटा, राजस्थान के श्री सीमंधर जिनालय में श्री 1008 तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का निर्वाण कल्याणक और दशलक्षण महापर्व मनाया गया है।
भगवान वासुपूज्य स्वामी का पावन निर्वाण कल्याणक महोत्सव
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। शहर के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध इंद्र विहार क्षेत्र में स्थित श्री सीमंधर जिनालय में श्री 1008 तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी का पावन निर्वाण कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा और भव्य भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस विशेष धार्मिक अवसर पर जैन समाज के द्वारा मनाए जाने वाले अत्यंत पवित्र दशलक्षण महापर्व का भी विशेष संयोग बना हुआ था। जिनालय के पावन परिसर में उपस्थित सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालु अत्यंत प्रसन्न और शांत मुद्रा में नजर आए, जो पूरी तल्लीनता के साथ पारंपरिक पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित हुए। इस पूरे धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर का संपूर्ण वातावरण अद्भुत भक्ति से परिपूर्ण रहा।
इस पावन अवसर पर आयोजित विशेष पूजन और आराधना के दौरान मंच पर श्री स्वानूभवजी, संजय भेसरोड़गढ़ और अंकित मुमुक्षु आश्रम के कलाकारों ने अपनी सुमधुर और मनमोहक आवाज से जिनेंद्र भक्ति को बहुत ही सुंदर स्वर प्रदान किए। उनकी इन सभी भावपूर्ण और कर्णप्रिय प्रस्तुत्यों के साथ ही उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भी पूरी तल्लीनता के साथ पूजन में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई और भगवान वासुपूज्य के महान गुणों का स्मरण किया। कलाकारों की इन भक्तिमय प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद हर एक श्रद्धालु को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा सभागार धार्मिक धुनों से गूंज उठा।
पवित्र दशलक्षण महापर्व के इस पावन और महान अवसर के अंतर्गत उत्तम क्षमा सहित कुल दस धर्मों के सच्चे पालन और आंतरिक आत्मशुद्धि के आध्यात्मिक महत्व पर बहुत ही विस्तृत एवं सुंदर विचार रखे गए। उपस्थित सभी धर्मप्रेमियों ने भगवान वासुपूज्य के इस पावन निर्वाण कल्याणक के अवसर पर अपनी तरफ से मंगलकामनाएं व्यक्त करते हुए अपने जीवन को सदाचार के मार्ग पर चलाने का निर्णय लिया। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में धर्म, संयम, अनुशासन और अहिंसा के मार्ग पर पूरी निष्ठा के साथ चलेंगे ताकि उनका जीवन पूरी तरह सार्थक हो सके।
इस विशाल और गरिमामयी धार्मिक आयोजन के सफल और निर्बाध संचालन में समाज के सभी धर्मप्रेमियों, वरिष्ठजनों और युवाओं का बहुत ही विशेष एवं सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के बिल्कुल अंत में सभी ने मिलकर सामूहिक रूप से शांति पाठ किया और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को पूरी निष्ठा के साथ पूरा किया। इसी के साथ इस अत्यंत पावन, सांस्कृतिक और प्रेरणादायी आयोजन का बहुत ही सुंदर और गरिमामयी समापन हुआ, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों के दिलों पर एक गहरी छाप छोड़ी और सभी ने इसे लेकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
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