राजस्थान

स्यालोदड़ा में क्रेशर जोन की जांच और प्रदूषण पर ग्रामीणों के तीखे सवाल

औचक निरीक्षण से ठीक पहले क्रेशर बंद किए जाने और प्रदूषण विभाग की कार्यशैली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रदूषण जाँच वाहन

नीमकाथाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। सीकर जिले के अंतर्गत स्थित स्यालोदड़ा ग्राम के क्रेशर जोन में आज प्रदूषण विभाग द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के मन में बेहद गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का मुख्य रूप से यह गंभीर आरोप है कि प्रदूषण विभाग की टीम के आने से लगभग पांच घंटे पहले ही क्रेशर जोन के सभी क्रेशरों को पूरी तरह से बंद करवा दिया गया था। इसके बाद अब इन्हीं बंद पड़े क्रेशरों की स्थिति को आधार बनाकर निरीक्षण एवं रिपोर्टिंग का कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि औचक निरीक्षण से पहले ही क्रेशरों को बंद कर दिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में वास्तविक संचालन के समय होने वाले धूल और प्रदूषण के स्तर का सही और सटीक आकलन कैसे संभव हो पाएगा।

ग्रामीणों के सवाल

ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष यह सीधा और महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि क्या इस प्रकार की पूर्व सूचना देकर क्रेशरों को बंद करवाकर की गई जांच आमजन के साथ पूरी तरह न्यायसंगत है। क्या इस तरह की खानापूर्ति से सरकार को कभी भी वास्तविक प्रदूषण की स्थिति की सही और तथ्यात्मक जानकारी मिल पाएगी। यदि किसी भी भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत से ऐसा सुनियोजित खेल खेला गया है, तो इसकी एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है। स्यालोदड़ा क्षेत्र में लंबे समय से लगातार बढ़ रहे धूल प्रदूषण को लेकर ग्रामीण अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी स्पष्ट कहना है कि क्षेत्र में धूल की समस्या केवल क्रेशर या फैक्ट्री में सीधे काम करने वाले लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में आसपास रहने वाले आम नागरिक, किसान, छोटे बच्चे और बेजुबान पशु भी आते हैं।

पर्यावरणीय चिंता

क्षेत्र में उड़ने वाली धूल प्रदूषण से जुड़ी गंभीर बीमारियों और पूर्व समय में हुई अकाल मौतों को देखकर इस पूरे विषय को एक साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय गंभीर जनस्वास्थ्य और पर्यावरणीय मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए। स्थानीय जनता किसी भी विभाग के साथ किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहती है, बल्कि जनता केवल पूरी तरह से वास्तविकता पर आधारित, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई चाहती है। प्रशासन की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वह उद्योग और आमजन दोनों के हितों के बीच कानून के अनुसार उचित संतुलन बनाए तथा यह सुनिश्चित करे कि किसी भी जांच के दौरान ज़मीनी और वास्तविक स्थिति बिल्कुल भी छिपी न रहे।

प्रशासनिक मांग

ग्रामीणों की तरफ से प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें क्रेशर जोन की जांच बिना किसी पूर्व सूचना और वास्तविक संचालन की स्थिति में कराए जाने की बात शामिल है। इसके अलावा जांच की पूरी वीडियोग्राफी कराई जाए तथा समय, स्थान और संचालन की सही स्थिति को रिकॉर्ड किया जाए। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने निरीक्षण से पहले क्रेशरों को बंद करवाने की पूर्व सूचना लीक की थी, उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही वास्तविक समय में मानकों की स्वतंत्र निगरानी कराई जाए और नियमों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार इकाइयों व अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि जनता की सुरक्षा, प्रदूषण से बचाव और पर्यावरण की रक्षा किसी भी कागजी और औपचारिक रिपोर्ट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट पूरी तरह से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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