अफ्रीकी देश सूडान के एक दूरदराज इलाके में एक भीषण दुर्घटना घटी है, जहां स्वर्ण खदान धंसने के कारण ग्यारह मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है।
प्रतीकात्मक फोटो
खार्टूम, सूडान। अफ्रीकी महाद्वीप से इस वक्त एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। सूडान के एक दूरदराज इलाके में भीषण स्वर्ण खदान धंसने की वजह से बड़ा हादसा हुआ है। इस अप्रत्याशित और भयानक दुर्घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और राहत बचाव टीमों में खलबली मच गई है। देश के भीतर अनियंत्रित रूप से चल रहे खनन कार्यों के बीच इस तरह की आपदाओं का बार-बार सामने आना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसके कारण लगातार अनमोल जिंदगियां काल के गाल में समा रही हैं। [1]
प्राप्त शुरुआती जानकारियों के मुताबिक यह दुर्घटना इतनी अचानक हुई कि वहां काम कर रहे श्रमिकों को संभलने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिल पाया। स्वर्ण खदान धंसने की इस घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग और बचा-खुचा स्थानीय प्रशासन तुरंत मौके की तरफ दौड़ पड़ा। मलबे के नीचे दबे हुए मजदूरों को बाहर निकालने के लिए फौरन राहत और बचाव कार्यों का कठिन सिलसिला शुरू किया गया। हालांकि संसाधनों की भारी कमी और आधुनिक उपकरणों के अभाव के कारण राहत कर्मियों को बचाव अभियान चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों का यह मानना है कि देश में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके चलाए जा रहे इन अनौपचारिक और अवैध खनन केंद्रों पर रोक लगाना बेहद जरूरी हो चुका है। इस प्रकार की घटनाओं के पीछे मुख्य कारण बिना किसी तकनीकी सुरक्षा के गहरी खदानों में काम कराया जाना है, जो हर वक्त बड़े खतरे को न्योता देता है। स्वर्ण खदान धंसने के इस ताजा मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। सरकार और संबंधित विभागों द्वारा यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में इस तरह के हादसों की संख्या में और अधिक खतरनाक इजाफा देखने को मिल सकता है।
हादसे के तुरंत बाद से ही स्थानीय नागरिकों और स्वेच्छा से आगे आए स्वयंसेवकों ने अपने स्तर पर बचाव अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास किया है। मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सीमित संसाधनों के बीच मिट्टी और पत्थरों को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। स्वर्ण खदान धंसने के बाद से ही पूरे इलाके में मातम का माहौल छाया हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल हो चुका है। प्रशासन की तरफ से घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाने और उन्हें त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक बहुमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सके।
विशेष उल्लेखनीय है कि यह देश पिछले कई वर्षों से एक भीषण और विनाशकारी गृह युद्ध के साये में जीने को मजबूर है, जिससे अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इस आंतरिक संघर्ष और भुखमरी के माहौल के बीच आम जनता के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है, जिसके कारण लोग जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। स्वर्ण खदान धंसने जैसी घटनाएं इसी आर्थिक लाचारी का परिणाम हैं जहां लोग दो वक्त की रोटी के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को विवश हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्ष के कारण सरकारी नियंत्रण बेहद कमजोर हो चुका है, जिसका फायदा उठाकर इस तरह के अवैध और असुरक्षित खनन कार्य धड़ल्ले से लगातार संचालित किए जा रहे हैं।
यह सूडान में हुआ कोई पहला हादसा नहीं है। इससे एक हफ्ते पहले ही देश के दूसरे हिस्से में ऐसी ही एक और बड़ी खदान दुर्घटना घटी थी जिसमें बयासी मजदूरों की जान चली गई थी। देश के हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि प्राकृतिक संपदाओं का दोहन करने वाले माफिया बिना किसी डर के खतरनाक तरीकों से खदानों का संचालन कर रहे हैं। स्वर्ण खदान धंसने की इस हृदयविदारक घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि युद्धरत पक्षों ने तत्काल प्रभाव से इन गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई, तो आने वाले समय में मानवीय संकट और अधिक विकराल रूप धारण कर लेगा।
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