ACB ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी को भी हिरासत में लिया।
बरामद नकदी
उदयपुर, राजस्थान। राज्य के अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़ी एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जो पुलिस महकमे के भीतर भारी हलचल पैदा कर रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक बहुचर्चित मामले में बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एसओजी (SOG) यूनिट के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मुकेश सोनी के कथित दलाल को दो करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके तुरंत बाद मामले में पुख्ता सबूत मिलने और संलिप्तता पाए जाने पर एसीबी ने एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी को खुद उनके बालोतरा स्थित आवास से डिटेन (हिरासत में) कर लिया है, जिससे प्रशासनिक और पुलिस हलकों में हड़कंप मच गया है। [1]
विस्तृत जानकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला उदयपुर नगर निगम के बहुचर्चित 272 भूखंड (प्लॉट) घोटाले के प्रकरण से जुड़ा हुआ है। एसीबी के महानिदेशक के अनुसार, ब्यूरो की इंटेलिजेंस यूनिट को एक शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि इस चर्चित मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपियों को कानूनी राहत दिलाने, अन्य नए मामलों में आरोपी नहीं बनाने और जब्ती के दौरान बरामद किए गए दस्तावेजों को बिना रिकॉर्ड में लिए वापस लौटाने की एवज में भारी रकम की मांग की जा रही थी। यह रिश्वत की मांग सीधे तौर पर एसओजी के जांच अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी के नाम पर और उनके इशारे पर किए जाने की बात सामने आई थी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए बातचीत के दौरान रिश्वत की इस मांग का भौतिक सत्यापन कराया, जिसमें पुष्टि होने के बाद योजनाबद्ध तरीके से एक ट्रैप आयोजित किया गया। एसीबी की विशेष टीम ने परिवादी की फैक्ट्री पर जाल बिछाकर दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ 'टाटला' को दो करोड़ रुपये की कथित रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। इस दौरान बरामद की गई कुल दो करोड़ रुपये की राशि में चार लाख रुपये के वास्तविक नोट और शेष लगभग 1.96 करोड़ रुपये के डमी या सांकेतिक नोट शामिल थे, जिनका उपयोग इस प्रकार की गोपनीय ट्रैप कार्रवाई के दौरान किया जाता है।
दलाल की गिरफ्तारी के बाद जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो एसीबी के सामने एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी की सीधी संलिप्तता और मुख्य भूमिका के पुख्ता प्रमाण सामने आ गए। इसके बाद एसीबी की एक अन्य टीम ने त्वरित और गोपनीय कार्रवाई करते हुए एएसपी मुकेश सोनी को उनके बालोतरा स्थित निवास स्थान से खुद हिरासत में ले लिया। ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में अब एसओजी अधिकारी से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध वसूली के बड़े नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा यह सिंडिकेट कितने समय से सक्रिय था।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी सख्ती के साथ तेज कर दी है। इस उच्च स्तरीय और निष्पक्ष कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले महकमे में यदि कोई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। एसीबी के अधिकारी इस बात की भी गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या इस प्रकार के अन्य मामलों में भी पीड़ित लोगों से पैसों की अवैध वसूली की गई है, और पूछताछ के आधार पर जल्द ही कई अन्य बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
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