भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को एक मजबूत गति प्रदान करते हुए राफेल फाइटर जेट के उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण समझौता किया।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, भारत। देश के रक्षा और सामरिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है, जो भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने का काम करेगी। भारत सरकार ने देश के भीतर ही रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने की 'मेक इन इंडिया' नीति के तहत राफेल विमानों की उत्पादन श्रृंखला को और अधिक व्यापक बनाने का निर्णय लिया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नए समझौते से न केवल भारतीय वायुसेना के बेड़े को अत्याधुनिक तकनीकी वाले फाइटर जेट्स की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि देश में एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में एक मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम का भी निर्माण होगा। [1]
विस्तृत जानकारियों के मुताबिक, इस रक्षा सौदे के तहत फ्रांस की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन और भारत के रक्षा क्षेत्र के बड़े संस्थानों के बीच तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और संयुक्त उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया है। इस रणनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनाना है, जिससे विदेशों से आयात पर निर्भरता कम की जा सके। इस उत्पादन लाइन के विस्तार से देश के भीतर ही राफेल विमानों के कई महत्वपूर्ण पुर्जों और उन्नत प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा, जिससे भविष्य के रखरखाव और मरम्मत कार्यों में भी अभूतपूर्व आसानी होगी।
इस उच्च स्तरीय रक्षा समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का यह मानना है कि जब देश के भीतर ही राफेल जैसे अत्याधुनिक और शक्तिशाली मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों का उत्पादन होगा, तो इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि देश के युवा इंजीनियरों और तकनीशियनों को वैश्विक स्तर की एयरोस्पेस तकनीक सीखने और उस पर काम करने का प्रत्यक्ष अवसर भी मिलेगा।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी भारत के लिए इस उत्पादन लाइन का विस्तार बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान समय में जिस प्रकार से पड़ोसी देशों की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, उसके मद्देनजर भारतीय वायुसेना के पास अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की पर्याप्त संख्या होना अनिवार्य है। राफेल जेट अपनी उत्कृष्ट मारक क्षमता, रडार चकमा देने की तकनीक और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की खासियत के कारण दुनिया भर में अपनी श्रेणी के सर्वश्रेष्ठ विमानों में गिने जाते हैं, जो भारतीय वायुसेना के बेड़े की ताकत को अभेद्य बनाएंगे।
फिलहाल इस रक्षा समझौते के तहत अगले कुछ वर्षों में उत्पादन इकाइयों को पूरी तरह से क्रियाशील करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए देश के चुनिंदा रक्षा गलियारों (डिफेंस कॉरिडोर) में बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से किया जा रहा है। सरकार और रक्षा अधिकारियों की संयुक्त टीमें इस पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी कर रही हैं ताकि सभी समझौते तय समयसीमा के भीतर धरातल पर उतर सकें। इस बड़े कदम से भारत आने वाले समय में न केवल अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि मित्र देशों को भी रक्षा उपकरण निर्यात करने की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित करेगा।
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