राष्ट्रीय

2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर MDR शुल्क से राहत नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतानों पर MDR लगाने के फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और आर्थिक गलियारों से जुड़ी एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है, जो सीधे तौर पर करोड़ों व्यापारियों और डिजिटल लेन-देन को प्रभावित करती है। पिछले छह वर्षों से अधिक समय से पूरी तरह निशुल्क संचालित हो रही यूपीआई सेवाओं के नियमों में बदलाव के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की शीर्ष अदालत ने फिलहाल केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने वाली मांग को ठुकरा दिया है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने इस मामले में स्पष्ट किया कि नीतिगत मामलों में शुरुआती चरण में बिना विस्तृत सुनवाई के अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता है, जिससे आगामी 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नए नियमों के लागू होने का रास्ता साफ बना हुआ है।  [1]

अदालत की सुनवाई

विस्तृत जानकारियों के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस जनहित याचिका पर गहन सुनवाई की गई। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष यह दलील दी थी कि सरकार द्वारा 14 सितंबर को जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को यूपीआई पर घोषित एमडीआर फ्रेमवर्क बिना किसी पर्याप्त विधिवत संसदीय प्रक्रिया, पारदर्शिता या व्यापक सार्वजनिक परामर्श के जल्दबाजी में लागू किया गया है। याचिका में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें कार्यपालिका को बिना ठोस दिशानिर्देशों के डिजिटल भुगतानों पर छूट या शुल्क तय करने के अनियंत्रित अधिकार मिलने का आरोप लगाया गया है।

ढांचा और प्रावधान

सरकार की ओर से पूर्व में घोषित नए नियमों के तहत आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क प्रभावी होना है। हालांकि, आम नागरिकों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन और 2,000 रुपये तक के छोटे भुगतान पूरी तरह से निशुल्क बने रहेंगे। इसके अलावा, 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतानों के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। रेलवे, बीमा, ईंधन और कृषि जैसे आवश्यक क्षेत्रों के लिए 5 रुपये का फ्लैट चार्ज तथा म्यूचुअल फंड व शेयर ब्रोकर से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत शुल्क का प्रावधान किया गया है।

चिंताएं और असंतोष

इस बीच, देश भर के खुदरा व्यापारियों और छोटे दुकानदारों के संगठनों ने इस नए शुल्क को लेकर अपनी गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। व्यापारियों का यह तर्क है कि पहले से ही कड़े मुकाबले और कम मुनाफे के बीच काम कर रहे सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSME) पर यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ उनके व्यापारिक मार्जिन को बुरी तरह प्रभावित करेगा। इसके साथ ही, याचिका में रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड भुगतानों को बिना किसी मौद्रिक सीमा के पूरी तरह छूट दिए जाने और यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के बीच के अंतर को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया गया है।

कानूनी प्रक्रिया

सर्वोच्च अदालत ने अंतरिम राहत देने से इंकार करते हुए इस मामले में केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस याचिका पर विस्तृत जवाब आने के बाद ही इसकी वैधानिक वैधता और अन्य पहलुओं पर नियमित सुनवाई की जाएगी। इस उच्च स्तरीय न्यायिक प्रक्रिया पर पूरे देश के वित्तीय विशेषज्ञों और व्यापारिक संघों की पैनी निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका दूरगामी असर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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