दयाल का नांगल गांव में प्राचीन मंदिरों वाली पहाड़ी पर खनन आवंटन के विरोध में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन प्रस्तुत करते कार्यकर्ता
नीमकाथाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। नीमकाथाना के निकटवर्ती ग्राम पंचायत दयाल का नांगल और पाटन पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख पहाड़ी पर बने धार्मिक स्थलों के लिए किए गए खनन आवंटन को लेकर ग्रामीणों और धार्मिक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। इसी गंभीर विषय को लेकर विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष मनोज बंसिया के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी नीमकाथाना के कार्यालय में सौंपा। इस दौरान ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
ग्रामीणों ने प्रशासन को अवगत कराया कि दयाल का नांगल ग्राम की जिस पहाड़ी पर खनन का आवंटन किया गया है, वहां कई अति प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल स्थित हैं। इस आवंटित खान क्षेत्र के दायरे में संत जगदीशदास जी, सूतलीदास जी, भैरव मंदिर, राम दरबार और भगवान देवनारायण का प्राचीन मंदिर बने हुए हैं, जिनकी क्षेत्र के लोगों में गहरी आस्था है। इन पवित्र और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के आसपास खनन कार्य होने से न केवल इन धार्मिक धरोहरों को भारी नुकसान पहुंचेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों की धार्मिक भावनाओं को भी गंभीर ठेस पहुंचेगी।
विश्व हिंदू परिषद और ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी कीमत पर धार्मिक आस्था के केंद्रों वाली इस पवित्र पहाड़ी पर खनन गतिविधियों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। आवंटन प्रक्रिया के कारण क्षेत्र के लोगों में भारी चिंता और नाराजगी का माहौल बना हुआ है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह के आवंटन से पर्यावरण के साथ-साथ हमारी प्राचीन संस्कृति और पूजा स्थलों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा, जिसे स्थानीय ग्रामीण और संगठन कभी भी सहन नहीं करेंगे और इसका पुरजोर विरोध जारी रखेंगे।
ज्ञापन के माध्यम से उपखंड अधिकारी नीमकाथाना से यह विशेष और पुरजोर मांग की गई है कि संबंधित पहाड़ी पर किया गया यह अवैध या अव्यवहारिक खनन आवंटन तत्काल प्रभाव से पूरी तरह से निरस्त किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर मामले में कोई ठोस सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो उन्हें मजबूरन एक बड़ा और उग्र आंदोलन करना पड़ेगा। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ दयाल का नांगल गांव के तमाम गणमान्य ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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