सीमा पार से रची जा रही आतंकी साजिश के मामले में एनआईए ने असम, पश्चिम बंगाल और केरल में एक साथ 16 ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, नई दिल्ली। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार से संचालित हो रहे एक खतरनाक आतंकी षड्यंत्र का पर्दाफाश करते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने एक बड़े क्रॉस-बॉर्डर टेरर सिंडिकेट और कट्टरपंथी नेटवर्क की जांच के सिलसिले में असम, पश्चिम बंगाल और केरल राज्यों में कुल 16 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस उच्चस्तरीय कार्रवाई के दौरान केंद्रीय एजेंसी एनआईए ने कई संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली और वहां से भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल युवाओं को बरगलाने और आतंकी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने के लिए किया जा रहा था। [1]
जांच एजेंसियों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और उनके स्लीपर सेल से जुड़ा हुआ है जो भारत के विभिन्न राज्यों में अपनी जड़ें फैलाने की फिराक में थे। एनआईए की अब तक की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि कुछ स्थानीय ऑपरेटर्स और संदिग्ध तत्व सीमा पार बैठे आंकाओं के इशारे पर देश के भीतर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और गोपनीय नेटवर्क तैयार करने का षड्यंत्र रच रहे थे। असम और पश्चिम बंगाल सहित दक्षिण भारत के राज्य केरल में सक्रिय इन संदिग्धों के आपसी संपर्कों और फंडिंग के स्रोतों का पता लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पिछले काफी समय से इस पूरे सिंडिकेट पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए थीं।
छापेमारी के दौरान एनआईए के अधिकारियों ने संदिग्ध ठिकानों से मिले मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल स्टोरेज डिवाइस को अपने कब्जे में ले लिया है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच के जरिए यह खंगाला जा रहा है कि इस आतंकी साजिश के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किन-किन लोगों से जुड़े हैं और इन्हें देश के भीतर से किस प्रकार की मदद मिल रही थी। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सोशल मीडिया और अन्य गुप्त मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से किस तरह की चरमपंथी सामग्री का प्रसार किया जा रहा था और किन-किन नए युवाओं को इस नापाक नेटवर्क में जोड़ा गया है।
सीमा पार से संचालित होने वाली इस तरह की आतंकी गतिविधियों के खुलासे से एक बार फिर देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र के समक्ष गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों से लेकर दक्षिण भारत तक फैले इस गुप्त नेटवर्क को समय रहते बेनकाब करना सुरक्षा बलों की एक बड़ी कामयाबी है। इस ऑपरेशन के बाद से तीनों राज्यों के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक चाक-चौबंद कर दी गई है तथा स्थानीय पुलिस भी एनआईए के साथ मिलकर संदिग्धों की गतिविधियों पर पूरी मुस्तैदी से नजर रख रही है ताकि राष्ट्र विरोधी ताकतों के मंसूबों को पूरी तरह विफल किया जा सके।
एनआईए की इन ताजा और व्यापक छापेमारी के बाद अब इस मामले में कई बड़े खुलासे होने और कुछ और नई गिरफ्तारियां किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद एजेंसी संदिग्धों से गहन पूछताछ करेगी, ताकि इस पूरे टेरर मॉड्यूल के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके। देश की संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले ऐसे तत्वों के विरुद्ध कानून का शिकंजा कसता जा रहा है, और शीर्ष अदालत तथा विशेष अदालतों के दिशा-निर्देशों के तहत इस मामले में आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
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