मॉस्को ने यूरोपीय संघ के देशों की कंपनियों के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए कई प्रमुख विदेशी कंपनियों की संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है।
प्रतीकात्मक फोटो
मास्को, रूस। रूस ने यूरोपीय संघ के देशों की कंपनियों के खिलाफ अपनी कॉर्पोरेट कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है। क्रेमलिन ने यूरोपीय फर्मों की रूसी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया है, जिससे पश्चिमी देशों के व्यावसायिक हलकों में भारी हलचल मच गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हालिया कार्रवाई के तहत कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को निशाना बनाया गया है, जिसे कूटनीतिक तनाव का एक नया हिस्सा माना जा रहा है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम यूरोपीय संघ की नीतियों और प्रतिबंधों का सीधा जवाब है। [1]
रूस की इस नई नीति के दायरे में Nestlé और Auchan जैसी कई प्रमुख यूरोपीय कंपनियां आ गई हैं, जिनकी संपत्तियों को अस्थायी प्रबंधन के अधीन कर दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के सख्त प्रशासनिक फैसलों से विदेशी निवेशकों का विश्वास तेजी से डगमगा रहा है। रूसी सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक यूरोपीय देश मॉस्को के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते रहेंगे, तब तक ऐसे आर्थिक उपाय जारी रहेंगे। प्रभावित कंपनियों के स्थानीय प्रबंधन के पास अब रणनीतिक फैसले लेने का अधिकार लगभग समाप्त हो गया है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की भूमिका की आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिमी देश यूक्रेन संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं। इसके विपरीत, यूरोपीय नेताओं ने इन एकतरफा और जबरन अधिग्रहण की कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है। कूटनीतिक जानकारों का अनुमान है कि इस तनाव के कारण दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक संबंध पूरी तरह से पटरी से उतर सकते हैं। यूरोपीय संघ आने वाले दिनों में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध पैकेजों पर विचार कर रहा है।
रूस में लंबे समय से व्यवसाय कर रही विदेशी कंपनियों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी और अनिश्चित साबित हो रही है। कई अन्य यूरोपीय ब्रांड अब अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूसी बाजार से पूरी तरह बाहर निकलने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस तरह के कदमों से रूस की घरेलू बाजार व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों में इस बात को लेकर डर है कि आने वाले समय में अन्य देशों की कंपनियों को भी इसी तरह के कड़े सरकारी हस्तक्षेप का सामना करना पड़ सकता है।
रूस और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता यह कॉर्पोरेट संघर्ष आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अडिग रहने के कारण निकट भविष्य में किसी बड़े कूटनीतिक समझौते की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। कॉर्पोरेट जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तब तक व्यावसायिक अनिश्चितता का यह दौर जारी रहेगा। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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