जिला बालिका क्रिकेट प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद राज्य स्तरीय चयन में धांधली कर बेहतर स्ट्राइक रेट वाली खिलाड़ी को बाहर करने के आरोप।
प्रतीकात्मक फोटो
बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर जिले के राजकीय एमजीजीएस विद्यालय, बांधणू में हाल ही में संपन्न हुई जिला बालिका क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान राज्य स्तरीय चयन में भारी अनियमितता, भाई-भतीजावाद और दुर्भावना का गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। चयन प्रक्रिया की इस धांधली के खिलाफ अब न्याय की मांग पूरी तरह से तेज हो गई है। प्रतियोगिता की चयन प्रक्रिया में खुली पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और दुर्भावना का खुला खेल खेलते हुए जिम्मेदार लोगों ने खेल भावना की धज्जियां उड़ा दी हैं। बेहतर स्ट्राइक रेट और शानदार खेल कौशल दिखाने वाली मेधावी खिलाड़ी को ताक पर रखकर कम स्कोर वाली चहेती छात्राओं को तरजीह देना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता बृजमोहन जाखड़ ने इस भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए बताया कि उनकी पौत्री रौनक जाखड़ ने महारानी बालिका विद्यालय की ओर से इस प्रतियोगिता में भाग लिया था और मैदान पर बेहतरीन प्रदर्शन किया था। बीस सितंबर को एलएनसी विद्यालय के खिलाफ खेले गए मुकाबले में रौनक ने महज 3 गेंदों पर ताबड़तोड़ 4 रन बनाते हुए 133 का शानदार स्ट्राइक रेट दर्ज किया था। इसके विपरीत, इसी स्कूल की दूसरी छात्रा ने 10 गेंदों में केवल 6 रन बनाए, जिसका स्ट्राइक रेट मात्र 60 था, लेकिन इसके बावजूद उसी का चयन राज्य स्तर के लिए कर लिया गया जबकि रौनक को मुख्य टीम तो दूर, वेटिंग लिस्ट से भी बाहर धकेल दिया गया।
मामले की परतें खोलने पर यह सामने आया कि यह कोई साधारण चूक नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश है। जाखड़ ने गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया कि वर्ष दो हजार पच्चीस में बज्जू में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान भी रौनक के बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद मात्र एक रन बनाने वाली खिलाड़ी का चयन कर लिया गया था। उस समय की गई विभागीय शिकायतों और अदालती प्रक्रिया की व्यक्तिगत खुन्नस और रंजिश निकालते हुए इस बार मुख्य चयनकर्ता व अन्य शिक्षकों ने गंदी मिलीभगत कर इस दुर्भावनापूर्ण साजिश को अंजाम दिया है, जिससे खेल जगत में भारी रोष व्याप्त हो गया है।
यहाँ तक कि खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और नियमों के साथ खिलवाड़ करने की हदें तब पार हो गईं जब बिना किसी वीडियोग्राफी के मनमर्जी से टाइ निकाली गई और चिलचिलाती धूप में दोपहर एक बजे नियम विरुद्ध तरीके से मात्र छह-छह ओवर का मैच करवाया गया। नियमित रूप से ओपनर के रूप में उतरने वाली खिलाड़ी रौनक को सुनियोजित साजिश के तहत टू-डाउन भेजा गया, जहां भयंकर दबाव और तेज धूप में दौड़ने के कारण वह गश खाकर पिच पर गिर पड़ी। इतना ही नहीं, जो प्रतियोगिता तेईस सितंबर तक प्रस्तावित थी, उसे भी मनमाने ढंग से बाईस सितंबर को ही समाप्त कर दिया गया, जिससे चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिवक्ता जाखड़ ने अब माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को लिखित शिकायत सौंपकर इस पूरे काले कारनामे की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराने और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि समय रहते इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई नहीं की गई, तो उभरती हुई प्रतिभाओं का मनोबल पूरी तरह से टूट जाएगा। पीड़ित परिवार ने खेल मैदानों में पनप रहे इस पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ उच्च स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ने की भी पूरी तैयारी कर ली है ताकि भविष्य में किसी अन्य खिलाड़ी की मेहनत इस तरह से बर्बाद न हो सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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