राजस्थान

डीजीएमएस और खनन विशेषज्ञों द्वारा खदान सुरक्षा के आधुनिक अनुभव साझा

हिन्दुस्तान जिंक की रामपुरा आगुचा खदान में खदान सुरक्षा और माइन शाफ्ट वाइंडर सिस्टम के तकनीकी उन्नयन पर विशेष कार्यशाला आयोजित हुई।

By अजय त्यागी 1 min read
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रामपुरा आगुचा खदान में एक विशेष कार्यशाला

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। भूमिगत खदानों में माइन शाफ्ट वाइंडर सिस्टम की विश्वसनीयता और तकनीकी उन्नयन के जरिए खदान सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की रामपुरा आगुचा खदान में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। महानिदेशालय खान सुरक्षा (डीजीएमएस) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी, खनन विशेषज्ञ, तकनीकी पेशेवर, विभिन्न उपकरण निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि और उद्योग विशेषज्ञ शामिल रहे। कार्यशाला का मुख्य केंद्र भूमिगत खदानों में उपयोग होने वाले वाइंडर सिस्टम को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के साथ डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल तथा नियामकीय मानकों के प्रभावी अनुपालन पर केंद्रित रहा।

विशेषज्ञों के विचार 

विभिन्न संस्थाओं और कंपनियों के विशेषज्ञों ने अपने बहुमूल्य अनुभव साझा करते हुए आधुनिक तकनीकों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। कार्यशाला के मुख्य अतिथि डीजीएमएस के उप महानिदेशक (नॉर्थ वेस्टर्न जोन) मुरलीधर बिदारी ने कहा कि माइन वाइंडर के संचालन में खदान सुरक्षा के लिए नियमों का कड़ाई से पालन, मजबूत इंजीनियरिंग, आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां और निरंतर सीखने की संस्कृति बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी कार्यशालाएं नियामकों, खदान संचालकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर खदान सुरक्षा मानकों को और अधिक उन्नत बनाने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आधुनिक तकनीक 

विशेषज्ञों द्वारा आईओटी आधारित सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम, वाइंडर सिमुलेटर, डिजिटल मॉनिटरिंग, ब्रेक सिस्टम डिजाइन और इवेंट रिकॉर्डिंग सिस्टम सहित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। इसके साथ ही, प्रिवेंटिव एवं प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और रिमोट मॉनिटरिंग के जरिए संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करने तथा अगली पीढ़ी के सुरक्षा समाधानों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। वैश्विक स्तर पर हुई माइन वाइंडर घटनाओं से मिले सबक और भविष्य में दुर्घटना के जोखिमों को कम करने के प्रभावी उपायों पर भी विचार साझा किए गए।

सक्रिय सहभागिता

इस कार्यशाला में डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी टी. श्रीनिवास, प्रकाश कुमार, श्याम सुंदर सोनी, उमेश कुमार राव, विनोद राजक, के. रविंदर और रूपेश कुमार श्रीवास्तव प्रमुख रूप से मौजूद रहे। वहीं, हिंदुस्तान जिंक के सीओओ किशोर एस., रामपुरा आगुचा के आईबीयू सीईओ राम मुरारी सहित कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी इस चर्चा में शामिल हुए। इसके अलावा, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, एबीबी, सिमेंस और सीआईटीआईसी के प्रतिनिधियों ने भी अपने महत्वपूर्ण तकनीकी अनुभव साझा किए।

समारोह का समापन 

कार्यक्रम के अंत में रामपुरा आगुचा के यूनिट हेड वेकेश चित्तौड़ा ने कार्यशाला में पधारे सभी अतिथियों और विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यशाला के माध्यम से नियामक संस्थाओं, खनन कंपनियों और तकनीकी साझेदारों के बीच सुरक्षा, तकनीक और नवाचार से जुड़े अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्राप्त हुआ। इस प्रकार यह आयोजन खदान सुरक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिससे भविष्य में खदान संचालन को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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