राजस्थान

कोटा में समता आंदोलन समिति ने सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

कोटा में समता आंदोलन समिति ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के कथित दुरुपयोग को रोकने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।

By अजय त्यागी 1 min read
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समता आंदोलन समिति ने ज्ञापन सौंपा

कोटा, राजस्थान। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कथित दुरुपयोग और इसके संभावित प्रभावों को लेकर समता आंदोलन समिति ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। समता आंदोलन समिति ने यह स्पष्ट किया है कि उनका यह विरोध किसी भी जाति या समुदाय के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों में कानून के निष्पक्ष, समान और पूरी तरह से प्रमाण-आधारित प्रयोग की मांग से जुड़ा है। समिति के अनुसार, वास्तविक मामलों में न्याय मिलना चाहिए, लेकिन व्यक्तिगत या संस्थागत विवादों में इसके दुरुपयोग को रोका जाना चाहिए।

वास्तविक अत्याचार 

समता आंदोलन समिति ने ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक जातिगत अत्याचार और भेदभाव की घटनाओं में कानून के प्रावधानों के अनुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, व्यक्तिगत विवाद, शैक्षणिक या संस्थागत मतभेदों, सेवा संबंधी मामलों अथवा वैचारिक असहमतियों में इस विशेष कानून के प्रावधानों के प्रयोग की प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष समीक्षा होना बेहद आवश्यक है। समिति का मानना है कि केवल शिकायत या एफआईआर दर्ज होने भर के आधार पर किसी भी व्यक्ति को सीधे तौर पर दोषी नहीं माना जाना चाहिए और जांच प्रक्रिया के दौरान निर्दोष व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता व प्रतिष्ठा की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

स्वतंत्र जांच 

ज्ञापन के माध्यम से समिति ने हाल के कुछ चर्चित प्रकरणों का हवाला देते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर विशेष बल दिया है। इसमें आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र से जुड़े मामले और यूट्यूबर अजीत भारती के प्रकरण का उल्लेख किया गया, जो वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया और उच्च न्यायालय के विचाराधीन हैं। समता आंदोलन समिति ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अंतिम निष्कर्ष केवल निष्पक्ष कानूनी जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही निकलने चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर सच्चाई प्रभावित न हो और कानून की मूल भावना बनी रहे।

साक्ष्यों का परीक्षण

समता आंदोलन समिति ने मुख्यमंत्री से यह प्रमुख मांग की है कि इस अधिनियम से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष एवं वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की एक प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। जांच एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और पूरी घटनाक्रम की वास्तविक पृष्ठभूमि का पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षण करें। इसके साथ ही, यदि जांच के दौरान कोई शिकायत झूठी या दुर्भावनापूर्ण साबित होती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत उचित कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

आंदोलन का संकल्प

कोटा जिला कलेक्टर की अनुपस्थिति में संभागीय अध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को यह ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष गोपाल गर्ग, संभागीय महामंत्री कमल सिंह, महामंत्री रासबिहारी पारीक, संयोजक राजेंद्र गौतम, एससी-एसटी प्रकोष्ठ अध्यक्ष छितर लाल, ओबीसी प्रकोष्ठ अध्यक्ष हरिशंकर सैनी, शहर अध्यक्ष शंकरलाल सिंघल और मंत्री श्रवण सोनी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। समता आंदोलन समिति के सभी प्रतिनिधियों ने कानून के दुरुपयोग पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने का दृढ़ संकल्प लिया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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