ED ने 1417 करोड़ रुपये के एक बड़े निवेश घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे राज्य में हड़कंप मच गया है।
प्रतीकात्मक फोटो
चेन्नई, तमिलनाडु। देशभर में वित्तीय धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तमिलनाडु से एक बहुत बड़ा मामला उजागर किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने यूनिक एक्सपोर्ट्स और उससे जुड़ी कंपनियों के माध्यम से चलाए जा रहे एक विशालकाय निवेश घोटाले की जांच के सिलसिले में दो प्रमुख आरोपियों को दबोचा है। बताया जा रहा है कि यह पूरा घोटाला लगभग 1417.86 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से जुड़ा हुआ है, जिसमें हजारों आम निवेशकों को अधिक मुनाफे का झांसा देकर ठगा गया था और इसके जरिए सुनियोजित तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया। [1]
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस फर्जी निवेश योजना के जाल में राज्यभर के लगभग 35,759 से अधिक निवेशक फंसे थे। आरोपियों ने निर्यात व्यापार में मुनाफे का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपए निवेश करवाए और बाद में उन्हें भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया। इस सुनियोजित धोखाधड़ी के कारण हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों की गाढ़ी कमाई डूब गई, जिसके बाद पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर केंद्रीय स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की गहन जांच शुरू की गई और इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट की परतें खुलने लगीं।
प्रवर्तन निदेशालय के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए एस. नवीन कुमार और एस. मुथुसेल्म नाम के दो मुख्य आरोपियों को धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस गिरोह ने अवैध तरीके से जुटाई गई रकम को छिपाने और उसे ठिकाने लगाने के लिए कई फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया था।
ईडी अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस पूरे सिंडिकेट के अन्य सहयोगियों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से छानबीन की जा रही है। पूर्व में भी केंद्रीय एजेंसी द्वारा इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे थे। इस बड़ी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अवैध नेटवर्क से जुड़ी संपत्तियों का पता लगाना और निवेशकों के पैसों को वापस लाने की दिशा में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है, ताकि अपराधियों के हौसले पस्त किए जा सकें।
प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में आर्थिक अपराधों और अवैध वित्तीय सिंडिकेट चलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस प्रकार के घोटालों की तह तक जाने के लिए वित्तीय खुफिया इकाइयों की मदद ली जा रही है और आने वाले दिनों में कई अन्य बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है। सरकार और जांच एजेंसियों के इस कड़े रुख से आर्थिक अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है और आम जनता में न्याय के प्रति भरोसा मजबूत हो रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।