मनुस्मृति पर चर्चा में विद्वानों ने वर्ण व्यवस्था, नारी स्वतंत्रता, दंड व्यवस्था और सामाजिक नियमों पर प्रमाण सहित विचार रखे।
मनुस्मृति पर चर्चा
बीकानेर, राजस्थान। शिक्षाविद् एवं समाजसेवी स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में आयोजित 2 दिवसीय विद्वत विचार गोष्ठी के पहले दिन शास्त्रों के ज्ञाता, विषय विशेषज्ञों और विद्वानों के विचारों के 2 सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता फरीदाबाद से पधारे आचार्य डॉक्टर निरंजनलाल मंगल और द्वितीय सत्र की अध्यक्षता कन्या गुरुकुल रोजड़ से आईं आचार्य शीतल ने की। परिचय और उद्घाटन से शुरू हुई परिचर्चा में मनुस्मृति पर चर्चा के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने प्रमाणों के साथ पक्ष और विपक्ष में विचार रखे। उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने प्रश्नों के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
मनुस्मृति पर चर्चा के दौरान रोजड़ के डॉ. दीपक आर्य, कानपुर के उत्कर्ष आर्य, बीकानेर की डॉक्टर चंचल पाठक, इलाहाबाद के डॉक्टर प्रेम शंकर सिंह, बीकानेर की डॉक्टर नंदिता सिंघवी, हैदराबाद के आचार्य हरिप्रसाद आचार्य, गुरुग्राम के डॉक्टर सुरेंद्र कुमार, फलोदी के केसरमल, बीकानेर के नीरज श्रीवास्तव, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉक्टर शिवलोचन शांडिल्य और हमीरपुर के आचार्य रविंद्र सहित अनेक वक्ताओं ने विचार रखे। मनुस्मृति पर चर्चा में विशेष रूप से वर्ण व्यवस्था और नारी स्वतंत्रता से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। मनुस्मृति के आधार पर दंड व्यवस्था, झूठी गवाही और अपराध से जुड़े प्रावधानों पर भी विवेचन किया गया।
मनुस्मृति पर चर्चा के दौरान इस बात पर भी विचार सामने आया कि प्राचीन समय में यह ग्रंथ जिन सामाजिक परिस्थितियों में सामने आया, वे वर्तमान समाज से अलग थीं। उस समय समाज की संरचना, परिवार व्यवस्था, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था, न्याय व्यवस्था तथा स्त्री और पुरुष की सामाजिक भूमिकाएं आज से भिन्न थीं। इसी संदर्भ में सामाजिक नियमों को वर्तमान समय में लागू करने से पहले यह देखना आवश्यक बताया गया कि वे आज की सामाजिक आवश्यकताओं और न्याय की वर्तमान समझ के अनुरूप हैं या नहीं। परिचर्चा में संतुलित और तथ्यात्मक रूप से रखे गए विचारों ने उपस्थित श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया और विभिन्न प्रश्नों पर संवाद का अवसर दिया।
कार्यक्रम के अंत में भजन सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें आर्य उत्तम जी ने मधुर भजन प्रस्तुत किए। विचार गोष्ठी के पहले दिन हुए दोनों सत्रों में विभिन्न शहरों से आए विद्वानों और विषय विशेषज्ञों ने मनुस्मृति से जुड़े अलग अलग पहलुओं पर अपने विचार सामने रखे। मनुस्मृति पर चर्चा के दौरान वक्ताओं ने प्रमाणों के आधार पर अपने पक्ष और विपक्ष प्रस्तुत किए, जबकि उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने प्रश्न पूछकर विषय से जुड़ी अपनी शंकाओं का समाधान जाना। विदित रहे कि गोष्ठी का आयोजन स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में किया जा रहा है और यह 2 दिवसीय कार्यक्रम है, जिसका आज पहला दिन था।
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