बाज़ार और निवेश

RBI MPC की बैठक शुरू, महंगाई के बीच रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद

RBI MPC की 3 दिन की बैठक शुरू हो गई है। महंगाई, 100 डॉलर से ऊपर कच्चा तेल और कमजोर रुपये के बीच रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद अब और मजबूत हुई है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की 3 दिन की बैठक सोमवार 5 अक्टूबर से शुरू हो गई। बैठक 7 अक्टूबर तक चलेगी और इसी दिन नीतिगत फैसले की घोषणा होगी। इस बार रेपो रेट पर बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर खास तौर पर टिकी है, क्योंकि महंगाई बढ़ रही है, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है और रुपये पर दबाव बना हुआ है। RBI ने पिछली कई बैठकों में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। ऐसे में अक्टूबर की बैठक से नीति में बदलाव की संभावना चर्चा के केंद्र में है।  [1]

महंगाई का दबाव

बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार, अक्टूबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना बन रही है, जबकि पहले दिसंबर में कदम उठने का अनुमान था। संस्था का कहना है कि करीब 2 साल की मौद्रिक नरमी के बाद अक्टूबर की बैठक में नीतिगत समर्थन वापस लेने की शुरुआत हो सकती है। SBI Research ने भी जोखिमों का संतुलन 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की ओर निर्णायक रूप से झुकने की बात कही है। उसके मुताबिक व्यापक होती महंगाई, कमजोर वैश्विक आर्थिक माहौल, बदलती तरलता और जोखिमों का नए सिरे से मूल्यांकन समय से पहले कदम उठाने का आधार मजबूत कर रहे हैं।

अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 4.82 प्रतिशत रही, जो जुलाई के 4.45 प्रतिशत से अधिक है। SBI Research ने मजबूत एल नीनो परिस्थितियों और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश को रबी उत्पादन के लिए जोखिम बताया है। दूसरी ओर, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। BNP Paribas India ने कहा कि हाल के हफ्तों में भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य कमजोर हुआ है। इस बीच अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंची है। बढ़ती महंगाई, महंगा कच्चा तेल और ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड ने रेपो रेट स्थिर रखने की गुंजाइश घटाई है।

फैसले की घड़ी

फिर भी रेपो रेट बढ़ाने का फैसला अभी तय नहीं है। Nomura के विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा चक्र में RBI की बढ़ोतरी 25 से 50 बेसिस प्वाइंट तक सीमित रह सकती है, जबकि बाजार इससे अधिक आक्रामक सख्ती का मूल्यांकन कर रहा है। उन्होंने 75 बेसिस प्वाइंट से अधिक की व्यापक सख्ती के बजाय सीमित पुनर्संतुलन वाले चक्र की 80 प्रतिशत संभावना बताई है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में अक्टूबर की बढ़ोतरी की संभावना को पहले के दिसंबर अनुमान से आगे लाया गया है। हालांकि अंतिम निर्णय MPC की बैठक में आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद ही होगा।

RBI की मौद्रिक नीति समिति 5 से 7 अक्टूबर तक बेंचमार्क रेपो रेट पर फैसला करेगी। यदि बढ़ोतरी होती है, तो यह फरवरी 2023 के बाद पहली रेपो रेट बढ़ोतरी होगी। फिलहाल नीतिगत रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है और अगस्त की पिछली बैठक में इसे अपरिवर्तित रखते हुए तटस्थ रुख कायम रखा गया था। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार महंगाई, ऊर्जा कीमतों, रुपये की कमजोरी और वैश्विक वित्तीय जोखिमों पर विशेष नजर रख रहा है। 7 अक्टूबर को सामने आने वाला फैसला यह स्पष्ट करेगा कि RBI रेपो रेट के जरिए बढ़ते मूल्य दबाव से निपटने के लिए कितनी सख्ती अपनाता है।

अस्वीकरण, Disclaimer:

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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