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सुरक्षा कैंप की बदली पहचान, 150 से ज्यादा छात्रों को मिला हॉस्टल

बस्तर के भाटपाल में 15 साल पुराने सुरक्षा कैंप को आदिवासी छात्रों के हॉस्टल में बदला गया है। यहां 153 छात्र रह रहे हैं, पढ़ाई का सहारा मिला है।

By अजय त्यागी 1 min read
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The Bhatpal campus currently houses two hostels for Scheduled Tribe boys studying in pre-matric and post-matric levels. (Express Photo)

नारायणपुर, छत्तीसगढ़। बस्तर के भाटपाल में करीब 15 साल तक सुरक्षा कैंप के रूप में इस्तेमाल हुई इमारत अब आदिवासी छात्रों के लिए छात्रावास बन गई है। अगस्त से यहां आसपास के माओवाद प्रभावित और दूरदराज गांवों के छात्र रह रहे हैं। परिसर में अनुसूचित जनजाति के लड़कों के लिए प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रावास संचालित हो रहे हैं। प्री मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 6 से 10 तक के 114 छात्र हैं, जबकि कक्षा 11 और 12 के पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में 39 छात्र रह रहे हैं। इस तरह कुल 153 छात्रों को आवास मिला है।  [1]

बदलाव की शुरुआत

नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य दूर और कठिन पहुंच वाले इलाकों के बच्चों को स्कूल के पास सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। भाटपाल में पहले पोस्ट मैट्रिक लड़कों का छात्रावास नहीं था, जिससे आदिवासी छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखना कठिन होता था। सुरक्षा कैंप के रूप में इस्तेमाल होने वाला यह परिसर करीब 15 साल पहले स्थापित किया गया था। अब सुरक्षा कैंप की इमारत का उपयोग छात्रों के रहने और पढ़ाई के लिए किया जा रहा है। प्रशासन इसे शिक्षा और स्थानीय समुदायों के विकास की दिशा में बदलाव के रूप में देख रहा है।

भाटपाल का छात्रावास आसपास के कई दूरदराज गांवों के छात्रों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। इनमें कोहकामेटा, मदमनार, ओरछा, नेलवाड़, छोटे डोंगर, कोरेंडा, चिमड़ी, रेमावंड और बेनूर जैसे इलाके शामिल हैं। राजबेड़ा के 12वीं कक्षा के छात्र कोमेंद्र भी यहां रह रहे हैं। उनका गांव स्कूल से करीब 22 किलोमीटर दूर है। पोस्ट मैट्रिक छात्रावास शुरू होने से उन्हें बाहर रहने और अतिरिक्त आवास खर्च उठाने की जरूरत कम हुई है। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा कैंप से छात्रावास बने परिसर में मिली प्रतिक्रिया को देखते हुए ऐसे और आवासीय इंतजाम किए जाने की योजना पर काम हो रहा है।

अगला कदम

भाटपाल के बाद अब अबूझमाड़ के प्रवेश क्षेत्र में कुरुशनार में भी छात्रावास तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा, एक अन्य पुराने सुरक्षा कैंप को लड़कियों के छात्रावास में बदलने की तैयारी है, जो कुछ दिनों में तैयार होने की उम्मीद है। वर्ष 2011 में यहां एक आवासीय स्कूल बनाया गया था। उस समय माओवादियों की अनुमति के बाद स्कूल में पक्की छत और ऊंची चारदीवारी नहीं बनाई गई थी, ताकि सुरक्षा बलों का कैंप वहां न बने। अब क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बदलने के बाद पुराने सुरक्षा कैंप के ढांचे का उपयोग शिक्षा के लिए किया जा रहा है।

इस बदलाव के साथ भाटपाल का सुरक्षा कैंप अब छात्रों की रोजमर्रा की पढ़ाई और रहने की जरूरतों से जुड़ गया है। प्रशासन की योजना ऐसे क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर देने पर केंद्रित है, जहां दूरी और आवास की कमी आगे की पढ़ाई में बाधा बनती रही है। कुरुशनार में प्रस्तावित छात्रावास और लड़कियों के लिए तैयार किया जा रहा नया परिसर भी इसी दिशा में अगला कदम है। पुराने सुरक्षा कैंप के शैक्षणिक उपयोग से क्षेत्र में बदली परिस्थितियों और स्थानीय बच्चों के लिए आवासीय शिक्षा सुविधाएं बढ़ाने की प्रशासनिक कोशिश सामने आती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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