राजस्थान

समय से पहले जन्मे नवजात का एनआईसीयू में सफल इलाज, जीती जिंदगी की जंग

समय से पहले जन्मे 980 ग्राम के नवजात का पीबीएम अस्पताल में 56 दिन इलाज चला। 1265 ग्राम वजन के साथ बच्चा स्वस्थ होकर घर पहुंचा।

By अजय त्यागी 1 min read
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उपचार करने वाली टीम

बीकानेर, राजस्थान। समय से पहले जन्म लेने वाले एक नवजात की जिंदगी की शुरुआत ही गंभीर चुनौतियों के साथ हुई। 28 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मे बच्चे का वजन केवल 980 ग्राम था और अविकसित फेफड़ों के कारण उसे गंभीर श्वसन समस्या थी। 10 अगस्त 2026 को चूरू जिले की एक परिधीय स्वास्थ्य इकाई में जन्म के बाद प्रारंभिक उपचार किया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन 11 अगस्त को उसे पीबीएम अस्पताल बीकानेर लेकर पहुंचे, जहां एनआईसीयू में तत्काल उपचार शुरू हुआ। करीब 56 दिनों के कठिन उपचार के बाद 5 अक्टूबर 2026 को बच्चा 1265 ग्राम वजन के साथ बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के स्वयं सांस लेते हुए और मां का दूध पीते हुए स्वस्थ अवस्था में घर लौटा।

वेंटिलेटर से जंग

समय से पहले जन्म के कारण नवजात के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे। चिकित्सकों ने तत्काल सर्फेक्टेंट थैरेपी दी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। रक्तचाप और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक मापदंडों को बनाए रखने के लिए इनोट्रोपिक दवाएं दी गईं। आवश्यकता पड़ने पर पैक्ड रेड ब्लड सेल ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। बच्चा करीब 10 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहा। सुधार के बाद उसे पहले सीपीएपी और फिर नेजल प्रोंग ऑक्सीजन सपोर्ट पर लाया गया। उपचार के दौरान बार बार एपनिया यानी अचानक सांस रुकने की स्थिति बनी। हालात गंभीर होने पर उसे दोबारा इंट्यूबेट कर वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। 28 अगस्त को उसे फिर सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटाया गया और इसके बाद स्थिति धीरे धीरे स्थिर होती गई।

मां बनी उपचार का सहारा

समय से पहले जन्म के बाद नवजात के उपचार में आधुनिक मशीनों और दवाओं के साथ मां की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। शुरुआत में ओजी ट्यूब के जरिए फीडिंग दी गई। स्वास्थ्य में सुधार के साथ चम्मच से दूध देने की प्रक्रिया शुरू की गई और बाद में मां को स्तनपान कराने के लिए प्रशिक्षित किया गया। परिजनों को कंगारू मदर केयर की नियमित सलाह दी गई। मां ने लगातार बच्चे को अपने सीने से लगाकर कंगारू मदर केयर दी। इससे शरीर का तापमान बनाए रखने, वजन बढ़ाने और रिकवरी में सहयोग मिला। उपचार के दौरान बच्चे की फीडिंग, सांस और स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों की लगातार निगरानी की गई। धीरे धीरे उसकी स्थिति स्थिर हुई और वह ऑक्सीजन सपोर्ट से बाहर आया।

जांच के बाद छुट्टी

समय से पहले जन्मे इस नवजात का करीब दो महीने तक उपचार चला। 5 अक्टूबर को उसका वजन बढ़कर 1265 ग्राम हो गया। वह बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के स्वयं सांस ले रहा था और स्तनपान भी कर रहा था। अस्पताल से छुट्टी देने से पहले आरओपी स्क्रीनिंग कराई गई, जो सामान्य पाई गई। 2डी इको जांच में किसी प्रकार की जन्मजात हृदय संबंधी समस्या सामने नहीं आई और ब्लड कल्चर भी स्टेराइल रहा। सुनने की क्षमता के आकलन के लिए बीईआरए और ओएई जांच फॉलोअप में कराने की सलाह दी गई। इसके बाद बच्चा बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से घर रवाना हुआ। यह अत्यंत कम जन्म वजन वाले नवजात की सफल रिकवरी रही।

एनआईसीयू टीम का प्रयास

समय से पहले जन्मे इस नवजात की सफल रिकवरी बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जी.एस. तंवर के मार्गदर्शन में एनआईसीयू टीम के सामूहिक प्रयासों से संभव हुई। टीम में डॉ. रेनू अग्रवाल, डॉ. कुलदीप सिंह बिठू, डॉ. लक्ष्मण, डॉ. इंदिरा, डॉ. अंजली, डॉ. भरत, डॉ. संजय, डॉ. हर्षित, डॉ. गैलेक्सी, डॉ. ईशा और डॉ. राजेश ने उपचार एवं निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नर्सिंग ऑफिसर्स बसंती, सिगार, धन्नाराम, अनिता, पायल, पिंकी, प्रियंका, तारा, सीमा, नवीन सहित समस्त नर्सिंग स्टाफ ने दिन रात क्लीनिकल केयर किया। स्टाफ ने बच्चे की हर सांस और हर बदलाव पर निगरानी बनाए रखी। उपचार के दौरान टीम के सतत प्रयासों से नवजात की हालत में सुधार जारी रहा।

डॉ. जी.एस. तंवर

डॉ तंवर ने बताया सफलता

बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जी.एस. तंवर ने कहा कि 980 ग्राम के नवजात का स्वस्थ होकर घर जाना केवल भावनात्मक रूप से सुखद क्षण नहीं, बल्कि चिकित्सकीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण परिणाम है। उन्होंने कहा कि 980 ग्राम के इस नवजात का स्वस्थ होकर जाना केवल एक चमत्कार नहीं है। इंटैक्ट सर्वाइवल जैसा सार्थक परिणाम निरंतर मॉनिटरिंग, प्रोटोकॉल आधारित उपचार और अनुशासित देखभाल का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यही उनकी एनआईसीयू की नींव है। डॉ. तंवर ने इस उपलब्धि को पूरी टीम के समर्पण, माता पिता के विश्वास और ईश्वर की कृपा से संभव बताया। वहीं सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. एस.के. वर्मा ने पूरी टीम को बधाई दी।

डॉ. एस.के. वर्मा

डॉ वर्मा ने जताया भरोसा

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. एस.के. वर्मा ने कहा कि 980 ग्राम के अत्यंत कम वजन वाले नवजात का सफल उपचार बाल रोग विभाग एवं एनआईसीयू टीम की क्लीनिकल दक्षता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि डॉ. जी.एस. तंवर के नेतृत्व में चिकित्सकों, नर्सिंग, पैरामेडिकल और अन्य सहयोगी स्टाफ ने जिस समर्पण के साथ कार्य किया, वह सराहनीय है। डॉ. वर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार की निःशुल्क चिकित्सा योजनाओं के कारण गंभीर और जटिल रोगियों को भी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध हो रहा है। गंभीर बच्चों के टर्शियरी एवं क्वाटर्नरी स्तर के उपचार के लिए आमजन का मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर बढ़ता विश्वास इस व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है। समय से पहले जन्म के बाद इस नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना उपचार की इस व्यवस्था में विश्वास को भी दर्शाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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