राजस्थान

नेत्र स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, बच्चों से बुजुर्गों तक विशेष संदेश

नेत्र स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम में नियमित जांच, समय पर उपचार, बच्चों की आंखों की देखभाल और मरणोपरांत नेत्रदान को लेकर संदेश दिया गया।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। विश्व दृष्टि दिवस पर गुरुवार को सुवि नेत्र चिकित्सालय के सभागार में शैक्षणिक एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में नियमित नेत्र परीक्षण, समय पर उपचार और मरणोपरांत नेत्रदान का संदेश दिया गया। लव योर आईज, अर्थात अपनी आँखों से प्रेम कीजिए, के आह्वान के साथ वक्ताओं ने नेत्र स्वास्थ्य को परिवार की प्राथमिकता बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर दृष्टिदोष एवं नेत्र रोगों के उपचार संबंधी जागरूकता पोस्टर का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कोटा शाखा, कोटा डिवीजनल ऑफ्थेलमिक सोसायटी तथा आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के कोटा चैप्टर ने सुवि नेत्र चिकित्सालय के सहयोग से किया।

नियमित जांच पर जोर

कार्यक्रम में नेत्र स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने कहा कि दृष्टि शिक्षा, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और जीवन की गरिमा का महत्वपूर्ण आधार है। बुजुर्गों की घटती दृष्टि को उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर नहीं टालना चाहिए। मोतियाबिंद के पूरी तरह पकने की प्रतीक्षा करने के बजाय दृष्टि, दैनिक कामकाज और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार उपचार कराने का महत्व समझाया गया। काला पानी तथा मधुमेह से संबंधित आँखों के परदे के रोगों की समय पर पहचान के लिए नियमित जांच पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने समय पर चिकित्सकीय सलाह और उपचार को दृष्टि की देखभाल का जरूरी हिस्सा बताया।

बच्चों की आंखों पर ध्यान

बच्चों में बढ़ते निकट दृष्टिदोष और मोबाइल कंप्यूटर के लगातार उपयोग से होने वाली आँखों की थकान एवं सूखेपन पर भी चर्चा हुई। बच्चों को प्रतिदिन बाहर खेलने, प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने तथा पढ़ाई और स्क्रीन के उपयोग के बीच विराम लेने के लिए प्रेरित किया गया। हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड तक 20 फीट दूर देखने और नियमित रूप से पलकें झपकाने का संदेश दिया गया। समय से पहले जन्मे शिशुओं की आँखों के परदे की समयबद्ध जांच का महत्व भी बताया गया। अभिभावकों से बच्चों की दृष्टि में बदलाव या परेशानी दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने की अपील की गई।

नेत्रदान का संदेश

नेत्र स्वास्थ्य के साथ नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी कार्यक्रम में जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि मरणोपरांत कॉर्निया दान किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का अवसर बन सकता है। परिवारों से नेत्रदान के विषय में संवाद करने और इस मानवीय संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया गया। आँख में चोट, अचानक दृष्टि घटने या संक्रमण होने पर घरेलू उपचार के बजाय शीघ्र नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में आँखों की देखभाल को जीवनभर की जिम्मेदारी बनाने तथा नेत्रदान के माध्यम से दूसरों के जीवन में उजाला फैलाने की अपील की गई।

चिकित्सकों ने रखे विचार

कार्यक्रम में डॉ. सुरेश पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. अजीत धाकड़, डॉ. राजेन्द्र चन्देल, डॉ. अमित सिंह राठौड़, डॉ. संजय सोनी, सुश्री अनिता चौहान, श्री भुवनेश गुप्ता, डॉ. अशोक गुप्ता और श्री जी. डी. पटेल सहित चिकित्सकों एवं अतिथियों ने व्याख्यान प्रस्तुत किए और विचार साझा किए। आयोजक संस्थाओं की ओर से आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के कोटा चैप्टर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कोटा शाखा और कोटा डिवीजनल ऑफ्थेलमिक सोसायटी के पदाधिकारी कार्यक्रम से जुड़े रहे। सुवि नेत्र चिकित्सालय की ओर से डॉ. सुरेश पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. सत्येन्द्र कुमार गुप्ता, डॉ. सुभाष गुप्ता और डॉ. निपुण बागरेचा भी आयोजन से जुड़े रहे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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