स्टारलिंक की एंट्री पर मस्क ने अंबानी को प्रधानमंत्री कहकर तंज कसा। एकाधिकारवादी शोषण का आरोप लगाते हुए उन्होंने प्रतिस्पर्धा की अनुमति मांगी।
एलन मस्क और मुकेश अंबानी
नई दिल्ली, भारत। स्टारलिंक की भारत में व्यावसायिक एंट्री को लेकर एलन मस्क ने उद्योगपति मुकेश अंबानी पर तीखा व्यंग्य किया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर मस्क ने अंबानी को संबोधित करते हुए लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी। उन्होंने कटाक्ष के साथ माफी मांगने का नाटक किया कि वह पहले अंबानी को भारत का असली बॉस नहीं पहचान पाए। इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या अंबानी स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने देंगे। मस्क ने अंबानी पर देश के लोगों के कथित एकाधिकारवादी शोषण को जारी रखने की इच्छा का आरोप लगाया। [1]
मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा कि भारत के कई क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक, इससे बच्चों को शिक्षा पाने और छोटे कारोबारों को वैश्विक बाजार में अपने उत्पाद बेचने के अवसर नहीं मिलते। उन्होंने दावा किया कि स्टारलिंक इन लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकता है। मस्क ने यह भी कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, जब अन्य संचार प्रणालियां विफल हो जाती हैं, तब सैटेलाइट नेटवर्क जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इस तरह उन्होंने प्रतिस्पर्धा के सवाल को इंटरनेट पहुंच और जनहित से जोड़कर पेश किया।
स्टारलिंक की भारत में व्यावसायिक शुरुआत को लेकर मस्क पहले भी मंजूरियों में देरी पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी करीब 5 वर्षों से भारतीय कानूनों और नियमों का पालन कर रही है। शुरुआत में मस्क ने कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूहों पर कंपनी की एंट्री रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया था, लेकिन किसी व्यक्ति या कंपनी का नाम नहीं लिया था। बाद में उन्होंने अंबानी का नाम लेकर सवाल उठाया। उनके एकाधिकार संबंधी आरोप मस्क के दावे हैं, उनके समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण पेश किए जाने का उल्लेख नहीं है।
केंद्र सरकार ने स्टारलिंक को रोके जाने या उसके साथ भेदभाव किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। सरकार के अनुसार, भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं देने वाले हर लाइसेंसधारी को सुरक्षा संबंधी नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं देने का लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन व्यावसायिक सेवा शुरू करने से पहले कंपनी को सुरक्षा संबंधी मंजूरियां और अन्य आवश्यक स्वीकृतियां हासिल करनी होंगी। सरकार ने भेदभावपूर्ण नियामकीय व्यवस्था के दावों को निराधार और गलतफहमी पर आधारित बताया है।
स्टारलिंक को लेकर विवाद अब कारोबारी प्रतिस्पर्धा, इंटरनेट की पहुंच और सरकारी मंजूरियों के सवालों पर केंद्रित है। मस्क का तर्क है कि सैटेलाइट इंटरनेट उन इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचा सकता है जहां पारंपरिक दूरसंचार ढांचा बनाना कठिन या महंगा है। उन्होंने अंबानी को भारत का असली बॉस कहकर व्यंग्य किया और प्रतिस्पर्धा की अनुमति देने की अपील की। दूसरी ओर, सरकार ने कहा है कि सुरक्षा मानकों का पालन सभी लाइसेंसधारियों के लिए जरूरी है। आईएएनएस की रिपोर्ट में अंबानी की ओर से मस्क की ताजा टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। इस विवाद में एकाधिकार और शोषण के आरोप मस्क के दावे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।