उत्तर प्रदेश

बाल विवाह बेटियों के बचपन पर संकट, अधिकारों में निवेश की अपील

बाल विवाह रोकने के लिए शारदा सेवा संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर समाज से एकजुट होने और बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को मजबूत करने की अपील की।

By अजय त्यागी 1 min read
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जागरूकता

मऊ, उत्तर प्रदेश (कुमुद रंजन सिंह)। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर शारदा सेवा संस्थान ने बाल विवाह की रोकथाम और बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए समाज से एकजुट होने की अपील की। संस्था के सचिव रुद्र प्रताप ने कहा कि इस वर्ष की संयुक्त राष्ट्र थीम बाल विवाह समाप्त करने और बालिकाओं के अधिकारों में निवेश करने का संदेश देती है। उन्होंने जोर दिया कि बाल विवाह केवल परंपरा का विषय नहीं है, बल्कि इससे बेटियों का बचपन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अपना भविष्य चुनने की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। संस्था ने इस मुद्दे पर सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।  [विडियो]

बचपन पर संकट

रुद्र प्रताप ने कहा कि हर 3 सेकंड में एक लड़की का बचपन बाल विवाह की वजह से प्रभावित होता है। उनके अनुसार, बाल विवाह बेटियों से शिक्षा जारी रखने, बेहतर स्वास्थ्य पाने और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने के अवसर छीन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या को रोकने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। परिवारों, पंचायतों, विद्यालयों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र और यूनिसेफ के 2026 के संदेश में भी बताया गया है कि दुनिया में हर साल 12 मिलियन से अधिक लड़कियों का विवाह वयस्क होने से पहले हो जाता है। यह वैश्विक चुनौती निरंतर कार्रवाई की मांग करती है।

अधिकारों में निवेश

संस्था के सचिव ने कहा कि बालिकाओं का सशक्तिकरण जन्म से समान व्यवहार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षित वातावरण से शुरू होता है। उन्होंने बताया कि बालिकाओं के अधिकारों में निवेश का अर्थ केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि उन्हें कौशल विकास, नेतृत्व और निर्णय लेने के वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना भी है। जब बेटियों को समान अवसर मिलते हैं, तो वे अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकती हैं और समाज के विकास में योगदान दे सकती हैं। बाल विवाह की रोकथाम के साथ शिक्षा और सुरक्षा पर निरंतर ध्यान देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शिक्षा और सुरक्षा

शारदा सेवा संस्थान ने ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय छोड़ने की समस्या, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक पाबंदियों पर चिंता जताई। संस्था ने अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा बीच में न रुकने दें और बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तत्काल हस्तक्षेप करें। संस्था के अनुसार, परिवार और समुदाय का सहयोग लड़कियों को सुरक्षित वातावरण देने तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बाल विवाह रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता, समय पर सूचना और जिम्मेदार कार्रवाई जरूरी है। संस्था ने दोहराया कि बालिकाओं को समान अवसर देना और उनके अधिकारों की रक्षा करना पूरे समाज को अधिक न्यायपूर्ण और सशक्त बनाने की दिशा में आवश्यक है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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