राहुल गांधी और 10 विपक्षी नेताओं की याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 14 खामियां बताईं। फीस की कमी और दस्तावेजों की त्रुटियों से सुनवाई टली।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली। राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन इंडिया के 10 अन्य नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत की रजिस्ट्री ने दाखिल याचिका में 14 खामियां दर्ज कीं, जिनमें कोर्ट फीस के 220 रुपये कम होना, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट प्रति और 11 में से 9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं होना शामिल है। कानूनी टीम ने खामियां दूर करने के बाद मामले को बुधवार को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। रजिस्ट्री की आपत्तियां प्रक्रिया से जुड़ी हैं, अभी याचिका के गुण दोष पर फैसला नहीं हुआ है। [1] [विडियो]
याचिका में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को चुनौती दी है। नेताओं ने स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है तथा जांच पूरी होने तक जारी एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। याचिका में निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। रजिस्ट्री ने यह सवाल भी उठाया कि जनहित याचिका जैसी प्रकृति वाले मामले में व्यक्तिगत चुनाव आयुक्तों को प्रतिवादी क्यों बनाया गया।
रजिस्ट्री की ओर से बताई गई अन्य खामियों में जरूरी दस्तावेजों की अस्पष्ट प्रतियां और कुछ कानूनी प्राधिकरण पत्रों का न होना या उन पर हस्ताक्षर नहीं होना शामिल है। जिन 9 नेताओं के वकालतनामे लंबित बताए गए हैं, उनमें सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एम ए बेबी, डी राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ई टी मोहम्मद बशीर शामिल हैं। रजिस्ट्री ने निर्वाचन आयोग के 24 जून 2025 के एसआईआर संबंधी फैसले और मतदाता नाम हटाने से जुड़े रिकॉर्ड की साफ प्रतियां भी मांगी हैं। ये आपत्तियां दूर होने के बाद ही याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकेगी।
याचिका में मांग की गई है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और बदलावों की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाई जाए, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य प्रतिष्ठित लोग शामिल हों। नेताओं ने बिना पूर्व सूचना और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए किसी मतदाता का नाम नहीं हटाने की व्यवस्था मांगी है। उन्होंने हटाए गए नामों की बूथवार सूची, नाम हटाने के कारण और उम्र तथा लिंग के आधार पर विवरण प्रकाशित करने के साथ पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की प्रक्रिया भी मांगी है। याचिका में एसआईआर पर अंतरिम रोक की मांग भी शामिल है।
यह याचिका सोमवार को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के बाद दाखिल की गई। पुलिस बैरिकेडिंग के कारण मार्च को अदालत से करीब 600 मीटर पहले रोक दिया गया था। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गांधी और खड़गे से मुलाकात से इनकार किया था, लेकिन कहा था कि वे न्यायिक प्रक्रिया के जरिए अपनी चिंताएं उठा सकते हैं और कानून के अनुसार जल्द सुनवाई हो सकती है। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की है। फिलहाल याचिका की सुनवाई रजिस्ट्री की आपत्तियां दूर होने पर निर्भर है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।