दिल्ली

प्रदर्शन से 2,000 करोड़ का कारोबारी नुकसान, व्यापारी हाईकोर्ट पहुंचे

2,000 करोड़ रुपये के कारोबारी नुकसान का दावा कर व्यापारी दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे। याचिकाओं में प्रदर्शन स्थलों पर तय नियम लागू कराने की मांग की गई है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। प्रदर्शनों और बैरिकेडिंग के कारण 2,000 करोड़ रुपये के कारोबारी नुकसान का दावा करते हुए व्यापारियों और वकीलों के संगठनों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों के चलते व्यावसायिक इलाकों में आवाजाही और कारोबार प्रभावित हुआ है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को अदालत में इन याचिकाओं पर सुनवाई का रास्ता खुला। व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर सुप्रीम कोर्ट की मानक संचालन प्रक्रिया लागू कराई जाए। हालांकि, 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा याचिकाकर्ताओं का दावा है, अदालत का प्रमाणित निष्कर्ष नहीं।  [1]   [विडियो]    

याचिकाकर्ताओं की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा कि उनकी मांग सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले से तय मानक संचालन प्रक्रिया लागू कराने तक सीमित है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता अपने बुनियादी अधिकारों के पालन की मांग कर रहे हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने शुरुआत में कहा कि प्रदर्शन से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही विचार कर रहा है। हालांकि, बाद में उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में इन याचिकाओं की सुनवाई पर आपत्ति नहीं जताई। मामले में व्यापारिक गतिविधियों, सार्वजनिक आवाजाही और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन का मुद्दा उठाया गया है।

नुकसान का दावा

याचिकाओं में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शनों और पुलिस पाबंदियों से व्यावसायिक इलाकों तक पहुंच प्रभावित हुई है। व्यापारियों के मुताबिक, बैरिकेडिंग और आवाजाही पर रोक के कारण दुकानों तथा कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ा। 2,000 करोड़ रुपये के कारोबारी नुकसान का दावा इसी प्रभाव के आधार पर किया गया है। अदालत ने अभी इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन कराने के लिए स्पष्ट और प्रभावी प्रक्रिया लागू हो, ताकि लोगों को विरोध का अधिकार मिले और बाजारों, दुकानों तथा आसपास के संस्थानों का कामकाज अनावश्यक रूप से बाधित न हो।

सुनवाई का क्रम

सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन सांब्रे ने इन 2 याचिकाओं को उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि विरोध प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं और मामले मंगलवार को सूचीबद्ध किए जाएंगे। एक याचिका में कहा गया कि पुलिस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन बंद कराया, लेकिन शुरुआत में कोई वैकल्पिक स्थल तय नहीं किया गया। बाद में जंतर मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और शाहदरा के सीबीडी मैदान तय किए गए।

अन्य याचिकाएं

हाईकोर्ट मंगलवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष विनोद जाखड़ की याचिका पर भी सुनवाई करेगा। इसमें 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच की मांग की गई है। भारतीय युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की याचिका में जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने को चुनौती दी गई है। व्यापारियों की याचिकाओं में 2,000 करोड़ रुपये के कारोबारी नुकसान का दावा और प्रदर्शन संबंधी नियम लागू कराने की मांग प्रमुख है। अदालत की सुनवाई के बाद ही इन मांगों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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