राजस्थान

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की मुश्किल बढ़ेगी, एआई कैमरे करेंगे निगरानी

एआई कैमरे यातायात नियम तोड़ने वालों की पहचान करेंगे। 331 चौराहों पर निगरानी की योजना, ऑटोमैटिक चालान और लंबित चालानों पर सख्ती की तैयारी।

By अजय त्यागी 1 min read
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एआई कैमरों का नियंत्रण कक्ष

जयपुर, राजस्थान। राजधानी की यातायात व्यवस्था में तकनीक की भूमिका बढ़ाने की तैयारी है। एआई कैमरे लगाकर शहर के प्रमुख चौराहों पर नियमों के उल्लंघन की निगरानी करने की योजना सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने के लिए 331 स्थान चिह्नित किए थे। हालांकि, बाद की मीडिया रिपोर्टों में इस योजना के लिए अलग आंकड़े सामने आए हैं। 22 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने करीब 352 स्थानों का अध्ययन कर प्रस्ताव जयपुर विकास प्राधिकरण को भेजा था। उस समय प्रस्ताव की जांच और बजट आकलन जारी था। इसलिए पूरे शहर में कैमरे लगने को पूर्ण हो चुकी व्यवस्था नहीं, बल्कि विस्तार की योजना के रूप में समझना जरूरी है।  [1]  [विडियो]   

कैमरों की योजना

पुलिस की योजना के मुताबिक, एआई कैमरे यातायात नियमों के उल्लंघन की प्रकृति और संबंधित चौराहों की जरूरत के आधार पर लगाए जाने हैं। डीसीपी ट्रैफिक प्रवीण नायक नूनावत के हवाले से दी गई जानकारी में बताया गया था कि टोंक रोड और जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर पहले से आईटीएमएस कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। नई व्यवस्था का उद्देश्य इस तकनीक को शहर के अधिक हिस्सों तक पहुंचाना है। हालांकि, बाद की रिपोर्ट में डीसीपी ट्रैफिक योगेश गोयल ने करीब 352 स्थानों के अध्ययन की जानकारी दी थी। कैमरों की संख्या और स्थापना की अंतिम स्थिति को लेकर नवीनतम आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

प्रस्ताव में एआई कैमरे लाल बत्ती पार करने, निर्धारित गति से तेज वाहन चलाने, स्टॉप लाइन का उल्लंघन करने और हेलमेट या सीट बेल्ट के नियम तोड़ने जैसे मामलों की पहचान करने के लिए प्रस्तावित हैं। इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम में कैमरों के साथ सेंसर और वाहन नंबर पहचानने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। राजस्थान सरकार के अभय कमांड सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट भी इस प्रणाली में एआई आधारित निगरानी, नियम उल्लंघन की पहचान और ई चालान से एकीकरण का उल्लेख करती है। हालांकि, हर उल्लंघन पर स्वतः चालान जारी होने की वास्तविक प्रक्रिया संबंधित प्रणाली के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

चालान में पारदर्शिता

प्रस्तावित व्यवस्था में एआई कैमरे यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों की तस्वीर, स्थान और उल्लंघन से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चालान बनने पर वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश भेजा जाता है। संबंधित व्यक्ति चालान का विवरण देखकर यह समझ सकता है कि किस स्थान पर और किस नियम के उल्लंघन के लिए कार्रवाई हुई है। इससे चालान की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और पुलिसकर्मियों तथा वाहन चालकों के बीच होने वाले विवाद घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में चालान की वैधता का फैसला उपलब्ध साक्ष्य और लागू नियमों के अनुसार होगा।

आईटीएमएस का उद्देश्य केवल नियम तोड़ने वालों को पकड़ना नहीं, बल्कि यातायात संचालन को बेहतर बनाना भी है। एआई कैमरे और सेंसर सड़क पर वाहनों की संख्या, यातायात के दबाव और जाम जैसी परिस्थितियों की निगरानी में मदद कर सकते हैं। अनुकूल व्यवस्था लागू होने पर सिग्नल का समय वास्तविक यातायात के अनुसार बदला जा सकता है। आपातकालीन वाहनों को प्राथमिकता देने जैसी सुविधाएं भी ऐसी प्रणालियों में विकसित की जा सकती हैं। फिर भी, इन सभी सुविधाओं को पूरे शहर में लागू मानना सही नहीं होगा। इनके लिए संबंधित विभागों की मंजूरी, तकनीकी व्यवस्था और परियोजना का क्रियान्वयन जरूरी है।

लंबित चालानों पर सख्ती

राजधानी में लंबित चालानों का मुद्दा भी यातायात पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। उपलब्ध जानकारी में 8 लाख से अधिक लंबित चालानों का उल्लेख किया गया है और ऐसे वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी बताई गई है। बाद की समाचार रिपोर्टों में भी बड़ी संख्या में चालान बकाया रहने और वसूली के लिए कदम उठाने की जानकारी सामने आई है। रामबाग चौराहे पर वाहन नंबर पहचानने वाली तकनीक और सूचना स्क्रीन के जरिए बकाया चालानों से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करने की पहल भी रिपोर्ट की गई है। वाहन मालिक परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपने वाहन से जुड़े चालान की स्थिति जांच सकते हैं।

कुल मिलाकर, एआई कैमरे यातायात नियमों के पालन और सड़क प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन 331 स्थानों पर कैमरे लगाने की शुरुआती जानकारी और बाद में सामने आए 352 स्थानों के अध्ययन के आंकड़े अलग हैं। 22 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, विस्तार का प्रस्ताव जयपुर विकास प्राधिकरण के पास जांच और बजट आकलन के चरण में था। इसलिए पूरी परियोजना लागू होने का दावा करना उचित नहीं होगा। आगे की स्थिति मंजूरी और कार्यादेश पर निर्भर करेगी। एआई कैमरे तभी प्रभावी साबित होंगे, जब तकनीक के साथ निष्पक्ष कार्रवाई, सही साक्ष्य और नियमों के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित हो।

अस्वीकरण (Discalimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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