राजस्थान

झाँब परिवार की तीन पीढ़ियां 71 साल से दशहरा परंपरा निभा रहीं

झाँब परिवार की तीन पीढ़ियां 71 साल से बीकानेर दशहरा कमेटी से जुड़ी हैं। संस्थापक महेरचंद से अध्यक्ष सुनीत तक परिवार की भूमिकाएं खास हैं।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

कमेटी के संस्थापक स्व. महेरचंद झाँब

बीकानेर, राजस्थान। झाँब परिवार का बीकानेर दशहरा कमेटी से जुड़ाव 71 वर्षों की परंपरा और सेवा की कहानी बयां करता है। इस परिवार की तीन पीढ़ियों ने दशहरा आयोजन में अलग अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं। कमेटी की स्थापना महेरचंद झाँब ने की थी। उनके बाद उनके पुत्र संजय झाँब ने महासचिव के रूप में काम संभाला, जबकि पौत्र नमन झाँब वर्तमान में झाँकी प्रभारी हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी आयोजन से जुड़े हैं। यह पारिवारिक जुड़ाव दशहरा महोत्सव के सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने में निरंतर योगदान की मिसाल के रूप में सामने आता है।  [विडियो]

कमेटी की नींव

बीकानेर दशहरा कमेटी की स्थापना 71 वर्ष पहले महेरचंद झाँब ने की थी। उनके प्रयासों से शुरू हुए आयोजन को आगे बढ़ाने में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। महेरचंद के बाद उनके पुत्र संजय झाँब ने कमेटी के महासचिव की जिम्मेदारी संभाली और परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। झाँब परिवार का यह सफर संस्थापक की भूमिका से शुरू होकर संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक पहुंचा है। दशहरा आयोजन से लंबे समय तक जुड़े रहने के कारण परिवार के सदस्यों ने विभिन्न भूमिकाओं में काम किया और कमेटी की गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने में भागीदारी निभाई।

परिवार के दूसरे पुत्र नरेश झाँब भी दशहरा महोत्सव में अपनी अलग पहचान रखते हैं। वह पिछले 20 वर्षों से दशहरे की झाँकी में बाबा रामदेव की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी यह भागीदारी आयोजन के धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष से परिवार के जुड़ाव को दर्शाती है। दूसरी ओर, महेरचंद झाँब के पौत्र नमन झाँब वर्तमान में कमेटी में झाँकी प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस प्रकार झाँब परिवार में संस्थापक से लेकर तीसरी पीढ़ी तक अलग अलग सदस्यों ने आयोजन में योगदान दिया है। उनकी भूमिकाएं दशहरा परंपरा के निरंतर संचालन से जुड़ी हुई हैं।

पीढ़ियों की सेवा

कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष सुनीत झाँब भी इसी परिवार से जुड़े हैं। वह महेरचंद झाँब के भाई के पुत्र हैं और बीकानेर दशहरा कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके साथ कमेटी के अन्य सदस्य दशहरा आयोजन से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करते हैं। परिवार के सदस्यों की भूमिकाएं अलग अलग हैं। संजय झाँब महासचिव रहे हैं, नमन झाँब झाँकी प्रभारी हैं और नरेश झाँब दो दशक से बाबा रामदेव की भूमिका निभा रहे हैं। सुनीत झाँब का अध्यक्ष पद पर होना परिवार के लंबे जुड़ाव की एक और कड़ी है।

महेरचंद झाँब द्वारा स्थापित कमेटी से लेकर वर्तमान जिम्मेदारियों तक झाँब परिवार की यात्रा यह दिखाती है कि सांस्कृतिक आयोजनों को बनाए रखने में कई पीढ़ियों की भागीदारी अहम हो सकती है। परिवार के सदस्यों ने संगठनात्मक कामकाज, झाँकियों के संचालन और धार्मिक पात्रों के अभिनय जैसी अलग अलग भूमिकाएं निभाई हैं। बीकानेर का दशहरा शहर की आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है। कमेटी के 71 वर्ष के इतिहास में झाँब परिवार का योगदान इसी निरंतरता का हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवार की तीन पीढ़ियां इस आयोजन से जुड़ी रही हैं और अपनी जिम्मेदारियां निभाती आई हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

 

#Bikaner #Dussehra #JhambFamily #RajasthanNews #CulturalHeritage #BabaRamdev #DussehraFestival #IndianTraditions
Read Full Article on RexTV India