भीलवाड़ा में रामलीला के जरिए स्थानीय कलाकार श्रीराम के आदर्शों और सनातन संस्कृति का संदेश दे रहे हैं। अतिथियों ने कलाकारों की साधना भी सराही।
रामलीला मंचन में पधारे अतिथिगण
भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच आजाद चौक की रामलीला स्थानीय कलाकारों के जरिए सनातन संस्कृति और श्रीराम के आदर्शों का संदेश दे रही है। आयोजन के दौरान पहुंचे अतिथियों ने मंच पर कलाकारों की साधना और प्रस्तुति की सराहना की। महापौर जसवंत कंवर, उपमहापौर राधेश्याम सोमानी, भाजपा प्रवक्ता भूपेंद्र सिंह राणावत बीलिया और श्रीराम मंडल अध्यक्ष शांति प्रकाश मोहता सहित सदस्यों ने आरती की। कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार तथा आदर्शों से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया गया। [विडियो]
महापौर जसवंत कंवर और उपमहापौर राधेश्याम सोमानी ने कहा कि स्थानीय कलाकार रामलीला के माध्यम से सनातन संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। उनके अनुसार, मंचन केवल धार्मिक कथा की प्रस्तुति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम भी है। श्रीराम मंडल अध्यक्ष शांति प्रकाश मोहता ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन नियमित रूप से होते रहने चाहिए। उन्होंने इन्हें नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और आदर्शों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम में कलाकारों के योगदान को सराहते हुए स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान महावीर उपाध्याय, राजकुमार माली, राजकुमार लोहार, किशन चौधरी, रामअवतार शर्मा, चौन सिंह चौहान, बजरंग वैष्णव, मंगल मिश्रा, बनवारी माली और राजेश सेन सहित अतिथियों का सम्मान किया गया। रामलीला कमेटी की ओर से सभी को रामनाम का दुपट्टा पहनाकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर कमेटी के संरक्षक अशोक पोखरना, कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद व्यास, कोषाध्यक्ष मोहन चौधरी, मुख्य निर्देशक नंदकिशोर जीनगर, रामगोपाल सोनी, देवेंद्र सिंह, दिनेश पंडित, कमल कसारा और अलका त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन में कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों की सहभागिता भी दिखाई दी।
रामलीला कमेटी अध्यक्ष मंजू पोखरना ने सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया। आजाद चौक का यह आयोजन स्थानीय कलाकारों, आयोजकों और शहर के अतिथियों की सहभागिता के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में दिए गए संदेश का केंद्र श्रीराम के आदर्शों, सनातन संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। आयोजकों और वक्ताओं ने धार्मिक आयोजनों की निरंतरता को महत्वपूर्ण बताया। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति और अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को सामुदायिक स्वरूप दिया। रामलीला के माध्यम से संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने और नई पीढ़ी को इन मूल्यों से परिचित कराने पर विशेष जोर रहा।
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