कन्या पूजन के अवसर पर मां भगवती की आराधना, कन्याओं को भोजन और उपहार भेंट किए गए। गुरु अर्जुन दास जी ने स्त्री शक्ति और सेवा का महत्व बताया।
कन्या पूजन
श्री गुरु अर्जुन दास सत्संग भवन एवं श्री रूद्र हनुमान सेवा समिति की ओर से हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस बार भी दुर्गा अष्टमी और महानवमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मां भगवती की सप्तशती का पाठ किया गया और कन्या पूजन के माध्यम से देवी स्वरूप कन्याओं की आराधना की गई। कन्याओं को हलवा, पूरी, खीर और चने का प्रसाद परोसा गया। साथ ही उपहार स्वरूप जूते और मोजे भेंट किए गए। इस आयोजन में कन्या पूजन के जरिए धार्मिक आस्था, सेवा और स्त्री शक्ति के सम्मान का संदेश दिया गया। [विडियो]
कन्या पूजन के महत्व पर साधकों को संबोधित करते हुए गुरु अर्जुन दास जी ने नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कन्या पूजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति और मातृत्व की आराधना है। कन्याओं के चरण धोना और उनके समक्ष नतमस्तक होना साधक को अहंकार, ईर्ष्या और अभिमान त्यागकर सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने स्त्री शक्ति को संपूर्ण सृष्टि का आधार बताते हुए कहा कि कन्या पूजन आस्था और कर्म, दोनों का प्रतीक है। सिद्धिदात्री की आराधना और कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराने की परंपरा को माता की कृपा, समृद्धि और अन्नपूर्णा भाव से भी जोड़ा जाता है।
कार्यक्रम में अभिषेक गुप्ता, उषा गुप्ता, वैभव, बसंत और हिमांशु उपस्थित रहे। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कन्याओं को भोजन कराने और उपहार भेंट करने के माध्यम से सेवा, सम्मान और समर्पण की भावना को प्रमुखता दी गई। गुरु अर्जुन दास जी के संदेश ने कन्या पूजन को केवल एक रस्म के बजाय अपने व्यवहार में विनम्रता अपनाने और स्त्री शक्ति का सम्मान करने की प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया। दुर्गा अष्टमी और महानवमी के इस आयोजन में मां भगवती की आराधना के साथ सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर भी जोर दिया गया। कन्या पूजन के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भक्ति और सेवा भाव के साथ पर्व मनाया।
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