राजस्थान

टिकट विवाद पर घमासान, टंकी पर चढ़े कार्यकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

भरतपुर में टिकट विवाद के बीच कांग्रेस कार्यकर्ता पानी की टंकी पर चढ़ गया। 35 लाख खर्च करने का दावा, टिकट वितरण में गड़बड़ी के आरोप और पुलिस की कार्रवाई।

By अजय त्यागी 1 min read
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टिकट विवाद में टंकी पर चढ़ा कार्यकर्ता

भरतपुर, राजस्थान। जिला परिषद चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ता योगेंद्र मंगलवार को विरोध जताते हुए भाजपा जिला कार्यालय के पास बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया। रूपबास निवासी 37 वर्षीय योगेंद्र वार्ड नंबर 21 से कांग्रेस का टिकट मांग रहा था। उसने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर टिकट वितरण में भ्रष्टाचार और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए। योगेंद्र का दावा है कि उसने 18 साल तक पार्टी के लिए काम किया और करीब 35 लाख रुपये खर्च किए, फिर भी उसे चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया। [1]    [विडियो]  

टंकी पर विरोध

ट्रैफिक सीओ योगेश के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने टंकी पर चढ़े योगेंद्र से बातचीत की और उसे समझाकर सुरक्षित नीचे उतार लिया। दूसरी ओर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा ने कहा कि जिला परिषद चुनाव के लिए अभी तक किसी भी प्रत्याशी का टिकट अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है। उन्होंने योगेंद्र के इस कदम को बेवजह बताते हुए कहा कि नाराजगी जताने का तरीका उचित नहीं है। दिनेश सूपा के मुताबिक, उनकी फोन पर योगेंद्र से बातचीत हुई है और पार्टी उसकी बात सुनेगी। इस टिकट विवाद में पुलिस की प्राथमिकता कार्यकर्ता को सुरक्षित नीचे उतारना रही।

योगेंद्र ने बताया कि उसने वर्ष 2008 में एनएसयूआई बयाना के ब्लॉक सचिव के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था। उस समय धीरज गुर्जर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, जबकि जेपी शर्मा जिला स्तर पर और धीरू पाराशर बयाना ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वर्ष 2011 में वह बयाना का चुनाव प्रभारी बना। उसके अनुसार, उसने विभिन्न समाजों के लोगों को चुनाव में टिकट दिलाने और उन्हें जिताने के लिए काम किया। वर्ष 2017 में वह युवा कांग्रेस का जिला सचिव और 2018 में एनएसयूआई का प्रदेश सचिव बना। उसने जयपुर और दिल्ली के आंदोलनों में भाग लेने का भी दावा किया।

टिकट पर आरोप

योगेंद्र का आरोप है कि करीब 5 साल पहले उसने जिला परिषद के वार्ड नंबर 22 से कांग्रेस का टिकट मांगा था, लेकिन तब भी उसे अवसर नहीं मिला। उसने तत्कालीन विधायक पर अपने चहेतों को टिकट दिलाने में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस बार वह वार्ड नंबर 21 से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ना चाहता था। उसका दावा है कि उसे टिकट देने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया गया और वितरण में पैसे के लेनदेन की गड़बड़ी हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। टिकट विवाद के बीच पार्टी की आधिकारिक स्थिति जिलाध्यक्ष ने अलग बताई है।

योगेंद्र ने कांग्रेस के चुनाव प्रभारी मुरारी लाल मीणा से बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें बताया गया था कि टिकट का फैसला स्थानीय नेतृत्व करेगा। उसने सवाल उठाया कि यदि निर्णय स्थानीय नेतृत्व को ही लेना है, तो चुनाव प्रभारी की भूमिका क्या है। योगेंद्र ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के युवाओं तथा महिलाओं को आगे बढ़ाने के संदेशों का उल्लेख करते हुए जमीनी कार्यकर्ताओं को अवसर देने की मांग की। उसने पार्टी में युवाओं को 50 प्रतिशत टिकट देने की बात लागू करने की अपील की। टिकट विवाद में उसके आरोपों और पार्टी के जवाब के बीच अब आगे की स्थिति पर नजर रहेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

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