भीलवाड़ा में विजयादशमी पर पथ संचलन के तीन मार्गों का त्रिवेणी संगम हुआ। स्वयंसेवकों की अनुशासित कतारों का नागरिकों ने पुष्पवर्षा से स्वागत किया।
पथ संचलन
भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष और विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को महानगर में पथ संचलन के दौरान अनुशासन और संगठनात्मक समन्वय दिखाई दिया। सात नगरों के स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में तीन अलग अलग स्थानों से निकले। कृषि उपज मंडी, हरि सेवा धाम और राजेंद्र मार्ग विद्यालय से शुरू हुए संचलन अंबेडकर चौराहे और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में एक साथ मिले। इस त्रिवेणी संगम के दौरान स्वयंसेवकों की कतारें आकर्षण का केंद्र रहीं। शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इस आयोजन में अनुशासित पथ संचलन प्रमुख आकर्षण रहा। [Video]
कार्यक्रम की समय सारणी के अनुसार सुबह 10 बजकर 21 मिनट पर अंबेडकर चौराहा और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में तीनों पथ संचलनों का संगम हुआ। अलग अलग दिशाओं से आई स्वयंसेवकों की कतारें एक साथ मिलीं तो क्षेत्र में अनुशासित कदमताल का दृश्य बना। इसके बाद सुबह 10 बजकर 26 मिनट पर गोल प्याऊ चौराहे से तीनों संचलन योजना के अनुसार अलग अलग मार्गों पर आगे बढ़े। भीमगंज थाना से एमजी अस्पताल के मुख्य द्वार के बीच स्वयंसेवकों का बड़ा समूह क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ा। मार्गों के किनारे लोग संचलन देखने के लिए एकत्रित रहे।
पथ संचलन के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों में नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया। प्रमुख चौराहों, बाजारों और मार्गों पर लोग आयोजन देखने के लिए जमा हुए। स्वयंसेवकों के गुजरने पर कई स्थानों पर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर अनुशासन और एकरूपता के साथ कदमताल करते रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े इस आयोजन में स्वयंसेवकों और समाज के लोगों के बीच उत्साह दिखाई दिया। नागरिकों की सहभागिता और जगह जगह हुए स्वागत ने विजयादशमी के कार्यक्रम को विशेष स्वरूप दिया।
तीनों पथ संचलन अपने निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए सरकारी दरवाजा, गोल प्याऊ चौराहा, एमजी अस्पताल, भीमगंज थाना, बड़ा मंदिर, बद्री विशाल मंदिर, शहीद चौक और झलकारी देवी चौराहा यानी सांगानेरी गेट तक पहुंचे। मार्ग में माली समाज नोहरा, ब्रज कोट के माताजी और माणिक्य नगर चौराहा सहित अन्य प्रमुख स्थल भी शामिल रहे। इन इलाकों से गुजरते समय स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियां लोगों का ध्यान खींचती रहीं। कार्यक्रम के अनुसार संचलनों का समापन हरि सेवा धाम और राजेंद्र मार्ग विद्यालय में हुआ। पूरे आयोजन में पथ संचलन की व्यवस्था समयबद्ध तरीके से संचालित की गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष संगठन की सौ वर्षों की यात्रा, सेवा, समर्पण और राष्ट्रभाव को स्मरण करने का अवसर है। विजयादशमी पर आयोजित पथ संचलन में तीन अलग अलग स्थानों से शुरुआत, एक क्षेत्र में त्रिवेणी संगम और फिर अलग अलग मार्गों पर आगे बढ़ने की योजना प्रमुख रही। संघ की ओर से समाज के लोगों को कार्यक्रम का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया गया था। नागरिकों की सहभागिता और पुष्पवर्षा से हुए स्वागत ने आयोजन को उल्लेखनीय बनाया। भीलवाड़ा महानगर का यह पथ संचलन अनुशासन, समन्वय और संगठनात्मक एकात्मता का संदेश लेकर संपन्न हुआ।
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