नेशनल हेराल्ड विवाद में अदालत ने बीडीए की बेदखली याचिका खारिज की। 1.14 एकड़ जमीन पर एजेएल को राहत मिली, लेकिन स्वामित्व का विवाद अब भी बाकी है।
प्रतीकात्मक फोटो
भोपाल, मध्य प्रदेश। नेशनल हेराल्ड जमीन विवाद में जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को भोपाल विकास प्राधिकरण की बेदखली याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड यानी एजेएल को संबंधित मामले में राहत मिली है। विवाद एमपी नगर के प्रेस कॉम्प्लेक्स में स्थित 1.14 एकड़ जमीन से जुड़ा है। बीडीए ने जमीन के कथित दुरुपयोग और आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई के बाद कंपनी को बेदखल कराने के लिए अदालत का रुख किया था। यह आदेश बेदखली के मुकदमे से संबंधित है। [1] [Video]
नेशनल हेराल्ड जमीन विवाद में बीडीए ने आवंटित जमीन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए आवंटन निरस्त किया था। इसके बाद प्राधिकरण ने एजेएल को जमीन से हटाने के लिए अदालत में सिविल मामला दायर किया। एजेएल की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विकास गुप्ता ने याचिका खारिज होने की पुष्टि की। अदालत के फैसले से कंपनी को बेदखली की मांग के विरुद्ध राहत मिली है। हालांकि, आदेश के विस्तृत कारण नहीं बताए गए हैं। इसलिए फैसले की कानूनी सीमा पर अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नेशनल हेराल्ड जमीन विवाद की पृष्ठभूमि में वर्ष 1981 का आवंटन अहम है। एमपी नगर के प्रेस कॉम्प्लेक्स में 1.14 एकड़ जमीन एजेएल को दी गई थी। इसी परिसर से हिंदी दैनिक नवजीवन प्रकाशित होता था, जिसका प्रकाशन 1992 में बंद हो गया। वर्ष 2014 में बीडीए ने जमीन के कथित दुरुपयोग को लेकर कंपनी को नोटिस दिया। एजेएल ने जवाब दिया, लेकिन प्राधिकरण ने उसे संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद आवंटन निरस्त किया गया और बेदखली के लिए अदालत में मामला पहुंचा। ये घटनाएं विवाद की पृष्ठभूमि बताती हैं, न कि स्वामित्व पर अंतिम फैसला।
नेशनल हेराल्ड जमीन विवाद इमारत के निर्माण और हिस्सों की बिक्री से भी जुड़ा है। खबर के अनुसार, वर्ष 2001 में नई दिल्ली की गंगा एंटरप्राइजेज के नरेंद्र कुमार मित्तल ने कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन पर इमारत बनवाई। बाद में इमारत के अलग अलग हिस्से कई लोगों को बेचे गए। भोपाल में हरमहेंद्र सिंह बग्गा और संजय सिन्हा मित्तल के साथ साझेदार के रूप में काम कर रहे थे। संपत्ति खरीदने वालों ने भी अपने अधिकारों के दावे किए और कुछ खरीदारों को उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश मिले। इससे विवाद की कानूनी प्रक्रिया लंबी हुई।
नेशनल हेराल्ड जमीन विवाद में बेदखली याचिका खारिज होने से एजेएल को इस मुकदमे में राहत मिली है, लेकिन इससे जमीन के मालिकाना हक पर अंतिम निर्णय अपने आप नहीं हो जाता। प्राप्त जानकारी के अनुसार आदेश के विस्तृत कारणों और अन्य लंबित मामलों की स्थिति से ही फैसले का व्यापक प्रभाव स्पष्ट होगा। इमारत के खरीदारों के दावे और संपत्ति से जुड़े अन्य विवाद अलग कानूनी प्रश्न बने हुए हैं। इसलिए फिलहाल पुष्ट निष्कर्ष यही है कि बीडीए की बेदखली याचिका खारिज हुई। जमीन के आवंटन और स्वामित्व पर अंतिम स्थिति के लिए आगे की कानूनी कार्यवाही देखनी होगी।
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