अमानक खाद की 600 बोरियों के मामले में मुख्य आरोपी मनीष त्रिपाठी गिरफ्तार। 7.80 लाख रुपये की खाद के मामले में उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।
प्रतीकात्मक फोटो
कोरिया, छत्तीसगढ़। अमानक खाद की आपूर्ति के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी मनीष त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। 44 वर्षीय त्रिपाठी को मध्य प्रदेश के मऊगंज थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। पुलिस ने उसे 24 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। मामला वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में खाद की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतों से जुड़ा है। जांच में सरकारी गोदाम से सहकारी समिति को भेजी गई 600 बोरियां अमानक पाई गई थीं। [1] [Video]
यह मामला खरीफ सीजन 2025 में खाद की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जांच के दायरे में आया। जांच के दौरान छिंदडांड़ स्थित शासकीय गोदाम से चिरमिरी समिति को भेजी गई खाद की 600 बोरियां निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। प्रत्येक बोरी में 50 किलोग्राम खाद थी। इस तरह कुल मात्रा 30,000 किलोग्राम यानी 30 मीट्रिक टन होती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन बोरियों की कुल कीमत 7 लाख 80 हजार रुपये बताई गई है। मामले में पुलिस ने आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की।
जांच में मनीष त्रिपाठी की भूमिका सामने आई, जो एक निजी कंपनी का प्रतिनिधि और सेल्स मैनेजर बताया गया है। पुलिस ने इस मामले में बैकुंठपुर थाने में अपराध क्रमांक 401/2025 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों के तहत की जा रही है। अमानक खाद की आपूर्ति से जुड़े इस मामले में पुलिस शिकायत, खाद की गुणवत्ता और आपूर्ति संबंधी तथ्यों की विवेचना कर रही थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश हुआ।
आरोपी की तलाश के लिए जिला पुलिस ने विशेष टीम गठित की थी। टीम ने मध्य प्रदेश के मऊगंज थाना क्षेत्र में दबिश देकर मनीष त्रिपाठी को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई का नेतृत्व निरीक्षक दिनेश कुमार चंद्रा और निरीक्षक अमोल खलखो ने किया। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक लवांग सिंह और आरक्षक रोशन इक्का भी शामिल थे। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया। इसके बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के साथ मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी का चरण पूरा हुआ, जबकि प्रकरण की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
जांच में सामने आई 600 बोरियों में प्रत्येक का वजन 50 किलोग्राम था, जिससे कुल मात्रा 30 मीट्रिक टन बनती है। खाद का मूल्य 7 लाख 80 हजार रुपये बताया गया है। यह मामला किसानों और सहकारी समिति तक पहुंचाई जाने वाली खाद की गुणवत्ता से संबंधित है। अमानक खाद का अर्थ है कि जांच में सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। हालांकि उपलब्ध खबर में खाद के प्रकार, नमूना परीक्षण के विस्तृत नतीजे और संबंधित कंपनी का नाम नहीं बताया गया है। इसलिए इन विवरणों के बारे में अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बैकुंठपुर थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 401/2025 के तहत पुलिस आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों में जांच कर रही है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया और उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। न्यायिक रिमांड का अर्थ है कि आरोपी को अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में रखा गया है। यह प्रक्रिया अपने आप में दोष सिद्ध होने का अंतिम फैसला नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार होगी। खाद की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें इस प्रकरण का मुख्य आधार हैं।
अमानक खाद की आपूर्ति के मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छिंदडांड़ के सरकारी गोदाम से चिरमिरी समिति को भेजी गई 600 बोरियां जांच में अमानक पाई गई थीं और उनकी कीमत 7 लाख 80 हजार रुपये बताई गई। पुलिस ने निजी कंपनी के प्रतिनिधि और सेल्स मैनेजर मनीष त्रिपाठी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा है। अब मामले की कानूनी दिशा जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी। किसानों तक गुणवत्तापूर्ण खाद पहुंचना कृषि व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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