गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन वैदिक आहुतियों, प्रज्ञा पुराण कथा और 251 दीपों के दीप यज्ञ में श्रद्धालु शामिल हुए। सोमवार को पूर्णाहुति होगी।
गायत्री महायज्ञ दूसरा दिन
भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में लखोटिया परिवार की ओर से आयोजित नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का दूसरा दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार, गायत्री मंत्र की आहुतियों, संस्कार कार्यक्रम और आध्यात्मिक प्रवचनों में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शाम को 251 दीपों से दीप यज्ञ किया गया, जिससे आयोजन स्थल जगमगा उठा। आयोजक कैलाश चन्द्र, सीए अंकित और पुलकित लखोटिया ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए आध्यात्मिक चेतना, सद्विचार और संस्कारों के प्रसार का प्रयास किया जा रहा है। [Video]
आयोजन के तहत सुबह 7.30 बजे से 10.30 बजे तक नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ और संस्कार कार्यक्रम हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर सुख, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। इसके बाद दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक प्रज्ञा पुराण कथा आयोजित हुई। कथा व्यास ने कहा कि निश्चित समय, निश्चित स्थान और निश्चित संख्या के साथ नियमित साधना करने से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने साधना में अनुशासन, नियमितता और अटूट श्रद्धा को आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया।
शाम को आयोजित दीप यज्ञ में 251 दीप प्रज्वलित किए गए। दीपों की रोशनी से आयोजन स्थल आलोकित हो उठा और श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। गायत्री मंत्र की आहुतियों, आध्यात्मिक प्रवचनों और दीप यज्ञ ने कार्यक्रम को धार्मिक वातावरण प्रदान किया। लखोटिया परिवार की ओर से आयोजित इस महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने यज्ञ, कथा और संस्कार कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म तथा अध्यात्म से जुड़े संदेश ग्रहण किए। तीन दिवसीय आयोजन का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, सद्विचार और संस्कारों को बढ़ावा देना है।
धार्मिक महोत्सव का समापन सोमवार, 26 अक्टूबर को होगा। अंतिम दिन सुबह 7.30 बजे से 10.30 बजे तक गायत्री महायज्ञ, संस्कार कार्यक्रम और पूर्णाहुति आयोजित की जाएगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक संगीतमय प्रज्ञा पुराण कथा होगी। इसके साथ ही लखोटिया परिवार की ओर से आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अंतिम दिन के अनुष्ठानों में शामिल होने की अपील की है। महायज्ञ और कथा के जरिए श्रद्धालुओं को नियमित साधना, अनुशासन, सद्विचार और संस्कारपूर्ण जीवन का संदेश दिया जा रहा है।
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