शरद पूर्णिमा अनुष्ठान में जैन साध्वियों ने मंत्र साधना और भक्तामर के श्लोकों के माध्यम से संयम, अनुशासन, समता और मानसिक शांति का संदेश दिया।
शरद पूर्णिमा अनुष्ठान
मुंबई, महाराष्ट्र। कालबादेवी स्थित आचार्य महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा दक्षिण मुंबई के तत्वावधान में शरद पूर्णिमा अनुष्ठान आयोजित किया गया। शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी, शासनश्री साध्वीश्री मंजुरेखाजी और सहवर्ती साध्वीवृंद के सान्निध्य में हुए इस कार्यक्रम में मंत्र साधना और संकल्प के माध्यम से जीवन में शांति बनाए रखने की प्रेरणा दी गई। साध्वीवृंद ने उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को संयम, अनुशासन और आत्मिक जागरूकता का महत्व समझाया। कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक साधना के साथ जीवन में समता और सकारात्मक भावों को मजबूत करने की प्रेरणा देना रहा। [Video]
शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने स्वयं साधना करते हुए उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को विभिन्न मंत्रों के साथ अनुष्ठान करवाया। उन्होंने भक्तामर स्तोत्र के कई श्लोकों का अर्थ समझाते हुए उनके आध्यात्मिक महत्व की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। शरद पूर्णिमा अनुष्ठान के दौरान इन पद्यों के माध्यम से पवित्रता, स्वास्थ्य और समता जैसे जीवन मूल्यों पर जोर दिया गया। साध्वीश्री ने धार्मिक साधना को मन की एकाग्रता और आत्मिक अनुशासन से जोड़ते हुए सहभागियों को संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अनुष्ठान में उपस्थित लोगों ने मंत्र साधना में भाग लिया।
शासनश्री साध्वीश्री मंजुरेखाजी ने शरद पूर्णिमा के पूर्ण चंद्रमा को संयम और जीवन की पूर्णता का प्रतीक बताते हुए त्याग, अनुशासन, सौहार्द और संतुलन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को जीवन में अपनाने से व्यक्ति अपने व्यवहार और विचारों में संतुलन विकसित कर सकता है। शरद पूर्णिमा अनुष्ठान के अनुभव को उन्होंने तन और मन के लिए आध्यात्मिक पोषण देने वाला बताया। उनके अनुसार, साधना से आनंद की अनुभूति के साथ जीवन में सकारात्मकता बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ आत्मानुशासन और शांतिपूर्ण जीवन की भावना प्रमुख रही।
कार्यक्रम में आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन के कार्याध्यक्ष गणपत डागलिया, इंदरमल धाकड़, सुखलाल सिंयाल, मीठालाल सिसोदिया और सभा के उपाध्यक्ष दिनेश धाकड़ सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। शरद पूर्णिमा अनुष्ठान के माध्यम से साधना, संयम और समता के संदेश को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम की जानकारी सभा के मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ और तेरापंथ युवक परिषद के उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी। आयोजन में धार्मिक परंपरा के निर्वहन के साथ आत्मिक शांति और अनुशासित जीवन के महत्व को रेखांकित किया गया।
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