विजयदशमी महोत्सव में राजपूत समाज ने शिक्षा, सहकारिता और सुधार पर जोर दिया। 61 जरूरतमंद महिलाओं को पेंशन और सिलाई मशीनें दी गईं।
विजयदशमी महोत्सव
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। श्री राजपूत सभा कोटा की ओर से कंसुआ स्थित श्यामवन मैरिज गार्डन में विजयदशमी महोत्सव आयोजित किया गया। ना माला, ना मंच की अवधारणा पर आधारित इस आयोजन में सामाजिक एकजुटता, समान सहभागिता और समाज सुधार को प्रमुखता दी गई। वक्ताओं ने युवाओं की शिक्षा को मजबूत बनाने, मृत्यु भोज और दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने तथा सहकारिता के जरिए आर्थिक प्रगति का आह्वान किया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी और जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की पहल भी प्रमुख रही। आयोजकों ने सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। [Video]
समाज सारथी रविन्द्र सिंह हाड़ा नरेश ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षाविद गोपाल सिंह नरूका ने युवाओं की शिक्षा को समाज की प्रगति का आधार बताया। बारां राजपूत सभा के अध्यक्ष अजित सिंह माथनी ने मृत्यु भोज और दहेज जैसी कुरीतियों से मुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया। बूंदी राजपूत समाज के अध्यक्ष हिम्मत सिंह गौड़ ने सहकारिता को सामाजिक और आर्थिक उन्नति का प्रभावी माध्यम बताया। वक्ताओं के अनुसार, विजयदशमी महोत्सव का उद्देश्य केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए साझा जिम्मेदारी विकसित करना भी था। शिक्षा और सामाजिक सुधार को भविष्य की प्रगति से जोड़ा गया।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता लोकेन्द्र सिंह राजावत ने कहा कि त्याग, तपस्या और बलिदान क्षत्रिय परंपरा के मूल आधार हैं। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी जमीन और गांव से जुड़े रहने के साथ कृषि तथा व्यवसाय के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उत्तर प्रदेश से आए आलोक सिंह भदौरिया ने बिना माला और मंच के सभी वर्गों को एक जाजम पर एकत्र करने की पहल की सराहना की। उन्होंने इस अवधारणा को उत्तर प्रदेश में भी अपनाने का प्रयास करने की बात कही। शिक्षाविद महेंद्र सिंह चौहान ने समाजबंधुओं और मातृशक्ति की बड़ी भागीदारी पर प्रसन्नता जताई। विजयदशमी महोत्सव में समान सहभागिता को सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
समारोह में समाज की जरूरतमंद विधवा और परित्यक्ता 61 महिलाओं को पेंशन की 12वीं मासिक किस्त वितरित की गई। इसके अतिरिक्त एक बुजुर्ग दंपती को केजी सिंह के सहयोग से पेंशन प्रदान की गई। स्वर्गीय ठकुरानी राजेश्वरी चौहान की स्मृति में उनके परिजन केजी सिंह गौड़ और प्रोफेसर गोपाल सिंह नरूका की ओर से एक एक सिलाई मशीन जरूरतमंद विधवा महिलाओं को भेंट की गई। इस पहल के माध्यम से आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों को सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। विजयदशमी महोत्सव में सामाजिक सरोकारों को महत्व देते हुए सहायता और सहभागिता को आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
कार्यक्रम में विवेक सिंह सिसोदिया, भवानी सिंह सोलंकी, राजेश सिंह परिहार, हेमलता चौहान, टीकम सिंह नरूका, निर्भय सिंह शक्तावत, कुंदन सिंह बांकावत, प्रताप सिंह हाड़ा, राजेंद्र सिंह राणावत, बुद्धराज सिंह हाड़ा, दशरथ सिंह, शंभू सिंह कानावत, मुकेश सिंह राजावत, अभय सिंह राजावत, सुमन हाड़ा, रणवीर सिंह राजावत, महावीर सिंह शक्तावत, रघुराज सिंह राठौड़, वीरेन्द्र सिंह बिष्ट, गोपाल सिंह भदौरिया, नीलू राजावत, जोधराज सिंह, अभिषेक सिंह राजावत, मेघश्याम सिंह राघव, महावीर सिंह शेखावत, अरिदमन सिंह जादौन, विक्रम सिंह पंवार, मेघराज सिंह राजावत और हेम कंवर सहित हजारों समाजबंधु एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे। हेमलता चौहान ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। विजयदशमी महोत्सव के जरिए सामाजिक एकजुटता, शिक्षा, कुरीतियों से मुक्ति और जरूरतमंदों की सहायता का संदेश दिया गया।
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