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पाकिस्तान की साजिश, जल सुरक्षा पर युद्ध की धमकी से बढ़ी तनातनी

पाकिस्तान की साजिश, जल सुरक्षा पर युद्ध की धमकी से बढ़ी तनातनी
पाकिस्तान की साजिश, जल सुरक्षा पर युद्ध की धमकी से बढ़ी तनातनी

इस्लामाबाद, पाकिस्तान। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में भारत को युद्ध की धमकी देकर अपनी हताशा को जगजाहिर कर दिया है। एआरवाई न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें लगा कि भारत उनकी जल आपूर्ति बाधित कर रहा है, तो वे युद्ध करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान की साजिश का हिस्सा है ताकि देश में व्याप्त गंभीर आंतरिक जल संकट और सरकारी कुप्रबंधन से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। [1]

पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, के बाद से नई दिल्ली ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है। भारत का रुख स्पष्ट है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से चल रहे आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि का निलंबन जारी रहेगा। पाकिस्तान का यह आक्रामक रुख अपनी विफलताओं को छिपाने की पुरानी नीति है।

युद्ध की धमकी

रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति बेहद अस्थिर है। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का एक हिस्सा जल सुरक्षा भी है और इसके लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यद्यपि पाकिस्तानी टीमों ने अतीत में लगभग 115 निरीक्षण किए हैं, लेकिन उनके पास पिछले एक साल की गतिविधियों के बारे में कोई ताजा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

"जिस क्षण हमें महसूस होगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है, और जल हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है, हम भारत के खिलाफ युद्ध करेंगे। निश्चित रूप से।" - ख्वाजा आसिफ, रक्षा मंत्री, पाकिस्तान।

यह विरोधाभासी बयान सरकार की विफलता को दर्शाता है। एक तरफ वे बिना किसी ठोस सबूत के भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पास भारत की हालिया गतिविधियों का कोई डेटा नहीं है। पाकिस्तान की साजिश से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने में विफल रहा है और अब वह अपनी जनता के गुस्से को शांत करने के लिए भारत को निशाना बना रहा है।

आंतरिक जल संकट

पाकिस्तान का आंतरिक जल संकट इतना गहरा हो गया है कि इसकी लगभग एक तिहाई आबादी बुरी तरह प्रभावित है, विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान के क्षेत्र। सिंध के सिंचाई विभाग के आधिकारिक आंकड़े वहां के चरमराते बुनियादी ढांचे की पोल खोलते हैं। नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि राइस और दादू नहरों में क्रमशः 38 प्रतिशत और 82 प्रतिशत की भारी कमी है।

सुक्कुर बैराज में पानी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि सरकार की आपसी जल वितरण विवादों को हल करने में असमर्थता एक आर्थिक नरसंहार का कारण बन सकती है। पाकिस्तान की साजिश है कि जल संसाधनों के इस प्रबंधन की विफलता का ठीकरा पाकिस्तान लगातार नई दिल्ली पर फोड़ रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि भारत चिनाब नदी के बहाव में हेरफेर कर रहा है और डेटा साझा नहीं कर रहा है।

विफलता की सच्चाई

दुनिया भर के जल विशेषज्ञ मानते हैं कि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु जल बेसिन के 80 प्रतिशत पानी का उपयोग करने की अनुमति प्राप्त है। लेकिन देश की वर्तमान सरकार संसाधनों का सही प्रबंधन करने में पूरी तरह नाकाम रही है। कुप्रबंधन के कारण किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है और उनकी उपजाऊ जमीनें बंजर होने की कगार पर हैं। इस स्थिति के लिए स्वयं पाकिस्तान की नीतियां ही जिम्मेदार हैं।

भारत के खिलाफ पाकिस्तान की साजिश केवल एक हताशापूर्ण कदम है। यह सच है कि पाकिस्तान आतंकवाद को प्रायोजित करना नहीं छोड़ रहा है, जिससे भारत के साथ उसके संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत ने अपनी नीति में स्थिरता बनाए रखी है और वह पाकिस्तान के हर उकसावे का जवाब देने के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब यह समझने लगा है कि पाकिस्तान की युद्ध की धमकियां केवल उसके अंदरूनी संकटों का परिणाम हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय जल संधियाँ और भू-राजनीतिक परिस्थितियां अत्यंत संवेदनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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