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न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपये का घोटाला: महाप्रबंधक और सहयोगियों पर मामला दर्ज



अजय त्यागी 2025-02-15 02:54:08 महाराष्ट्र

न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक
न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक
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मुंबई स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122 करोड़ रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक के महाप्रबंधक और लेखा प्रमुख हितेश मेहता समेत उनके सहयोगियों पर यह आरोप है कि उन्होंने बैंक की तिजोरियों से यह भारी रकम गबन की। इस घटना के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे जमाकर्ताओं में हड़कंप मच गया है।

घोटाले का खुलासा
बैंक के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) देवर्षि घोष ने शुक्रवार को मध्य मुंबई के दादर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, महाप्रबंधक और लेखा प्रमुख हितेश मेहता ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर प्रभादेवी और गोरेगांव कार्यालयों की तिजोरियों से 122 करोड़ रुपये का गबन किया। यह घोटाला 2020 से 2025 के बीच हुआ बताया जा रहा है। 

पुलिस कार्रवाई
शिकायत के आधार पर, दादर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409 (लोक सेवक, बैंकर या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, इसे आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया है, जिसने जांच शुरू कर दी है। 

आरबीआई की सख्ती
घोटाले के प्रकाश में आने के बाद, आरबीआई ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें ऋण देने, नई जमाराशियां स्वीकार करने, निवेश करने, देनदारियों के लिए भुगतान करने या संपत्तियों को बेचने पर रोक शामिल है। आरबीआई ने बैंक के बोर्ड को भी भंग कर दिया है और संचालन की देखरेख के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया है। 

जमाकर्ताओं में चिंता
आरबीआई की कार्रवाई के बाद, बैंक के ग्राहकों में भारी चिंता व्याप्त है। शुक्रवार सुबह से ही जमाकर्ता अपनी रकम निकालने की उम्मीद में बैंक की शाखाओं पर चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। बैंक की 28 शाखाओं में से अधिकांश मुंबई महानगर में स्थित हैं, जबकि सूरत और पुणे में भी इसकी शाखाएं हैं। 

आगे की जांच
ईओडब्ल्यू ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। बैंक के खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा ताकि गबन की पूरी सच्चाई सामने आ सके। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।