Fri, 04 April 2025 09:52:00pm
बीकानेर में उरमूल डेयरी द्वारा संचालित 'दूध का दूध, पानी का पानी' अभियान ने दूध में मिलावट के चौंकाने वाले तथ्यों को उजागर किया है। ग्राहकों की मांग पर इस निःशुल्क दूध जांच अभियान की अवधि बढ़ाकर 20 फरवरी 2025 तक कर दी गई है। यह अभियान राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (आरसीडीएफ), जयपुर के निर्देशानुसार उरमूल डेयरी के विपणन एवं गुण नियंत्रण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है।
अभियान का उद्देश्य और प्रक्रिया
अभियान का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके घर पर आने वाले खुले दूध की शुद्धता के प्रति जागरूक करना है। इसके तहत विभिन्न मोहल्लों और क्षेत्रों में निःशुल्क दूध जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां मशीनों एवं जांच किट स्ट्रिप्स की सहायता से दूध के नमूनों की जांच की जाती है। परिणाम मौके पर ही उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जाते हैं। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के विषय विशेषज्ञ शुभम गुलाटी उपभोक्ताओं को मिलावटी दूध के सेवन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े
उरमूल डेयरी के प्रबंध निदेशक बाबूलाल बिश्नोई ने बताया कि अब तक 561 दूध सैंपल की जांच की गई है, जिनमें से मात्र 81 सैंपल शुद्ध पाए गए हैं। शेष सैंपलों में बड़ी मात्रा में पानी की मिलावट के अलावा आरारोट, यूरिया, शैम्पू, सर्फ और अन्य हानिकारक रसायन पाए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार में उपलब्ध खुले दूध में मिलावट की समस्या कितनी गंभीर है।
उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
ग्राम पंचायत उदासर आर्मी गेट के सामने स्थित डेयरी बूथ पर आयोजित एक शिविर में स्थानीय उपभोक्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बूथ संचालक ने भी इस पहल में सक्रिय सहयोग दिया। उरमूल डेयरी द्वारा उपभोक्ताओं को दूध जांच कराने पर फ्री गिफ्ट हैम्पर, कैमल मिल्क और कैमल बिस्कुट के नमूने प्रदान किए जा रहे हैं। स्थानीय निवासी मगनाराम केड़ली ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की जांच नियमित रूप से होनी चाहिए, जिससे डोर-टू-डोर दूध की गुणवत्ता की निगरानी की जा सके।
प्रबंध निदेशक बाबूलाल बिश्नोई: एक परिचय
बाबूलाल बिश्नोई उरमूल डेयरी के प्रबंध निदेशक हैं। उनके नेतृत्व में डेयरी ने उपभोक्ताओं को शुद्ध और मिलावट रहित दूध प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बिश्नोई ने डेयरी उद्योग में अपने व्यापक अनुभव का उपयोग करते हुए मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त नीतियाँ अपनाई हैं, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।
विषय विशेषज्ञ शुभम गुलाटी: एक परिचय
शुभम गुलाटी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के एक प्रमुख विषय विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डेयरी विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की है और मिलावटी दूध के दुष्प्रभावों पर गहन शोध किया है। गुलाटी वर्तमान में उरमूल डेयरी के अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जहां वे उपभोक्ताओं को मिलावटी दूध के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
उरमूल डेयरी का 'दूध का दूध, पानी का पानी' अभियान मिलावटी दूध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से न केवल उपभोक्ताओं को जागरूक किया जा रहा है, बल्कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त संदेश भी दिया जा रहा है। आवश्यक है कि ऐसे अभियानों को निरंतर जारी रखा जाए, ताकि समाज में शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक दूध की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।