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मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर नया कानून: सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और सुनवाई की तारीख निर्धारित



अजय त्यागी 2025-02-19 07:35:06 दिल्ली

Senior advocate Prashant Bhushan at the Supreme Court for a hearing
Senior advocate Prashant Bhushan at the Supreme Court for a hearing
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भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव लाने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख निर्धारित की है।

कानून का सारांश
दिसंबर 2023 में पारित इस नए कानून के तहत, CEC और ECs की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर उनकी जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2023 में अपने एक फैसले में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI की समिति द्वारा इन नियुक्तियों की सिफारिश करने का निर्देश दिया था। नए कानून ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए CJI की जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया है।

याचिकाओं का मुख्य तर्क
गैर-सरकारी संगठन 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (ADR) और कांग्रेस नेता जया ठाकुर सहित कई याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका तर्क है कि यह कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित करता है और कार्यपालिका के प्रभाव को बढ़ाता है, जो संविधान के अनुच्छेद 324 का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 19 मार्च 2025 की तारीख निर्धारित की है। इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था, क्योंकि यह मामला CJI की चयन समिति में शामिल होने से संबंधित है। अब यह मामला किसी अन्य पीठ के समक्ष सुना जाएगा।

वर्तमान स्थिति
नए कानून के तहत, ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के बाद, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि सरकार ने अदालत के आदेश की अवहेलना करते हुए CJI को चयन समिति से बाहर कर दिया है, जिससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव लाने वाले इस कानून पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए महत्वपूर्ण होगा। 19 मार्च 2025 को होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है।