Fri, 04 April 2025 09:57:50pm
चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित 'द विलो कैफे' में रविवार शाम एक गोलीबारी की घटना सामने आई है, जिसमें पंजाब पुलिस के एक उच्च अधिकारी के बेटे पर गोली चलाने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी की पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
घटना का विस्तृत विवरण
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार रविवार शाम करीब 5:00 बजे, 'द विलो कैफे' में चार युवक पहुंचे। कुछ समय बाद, दो और युवक एक सुरक्षाकर्मी के साथ वहां आए और पहले से मौजूद युवकों के साथ शामिल हो गए। सुरक्षाकर्मी, जिसने खाकी वर्दी पहनी हुई थी, गेट के बाहर तैनात रहा। कैफे के हेड शेफ बलबीर राम के अनुसार, उन्हें ऑर्डर के मुताबिक खाने-पीने का सामान परोसा गया। करीब 5:35 बजे, टेरेस की दिशा से पटाखे जैसी आवाज सुनाई दी। सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर, एक युवक को गोली चलाते हुए देखा गया, जिसने घटना के तुरंत बाद पिस्टल छिपा ली और वहां से फरार हो गया।
पुलिस की प्रतिक्रिया
रिपोर्ट के अनुसार सूचना मिलने पर, सेक्टर-3 थाना पुलिस ने हेड शेफ बलबीर राम की शिकायत पर मामला दर्ज किया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान की है, जो सेक्टर-36 का निवासी बताया जा रहा है। हालांकि, चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं। एसएसपी कंवरदीप कौर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया और न ही संदेशों का जवाब दिया।
सीसीटीवी फुटेज में सामने आई जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में टेबल पर सात युवक बैठे दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से एक ने काले रंग की हुडी पहनी है, जिस पर सफेद सितारे बने हैं, और उसने चश्मा भी लगाया हुआ है। गोली चलाने के बाद, आरोपी ने पिस्टल छिपा ली और तुरंत वहां से निकल गया। फुटेज में एक व्यक्ति तस्वीर खींचता हुआ भी नजर आ रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह उनका साथी था या सुरक्षाकर्मी।
कैफे का परिचय
'द विलो कैफे' चंडीगढ़ के सेक्टर-10 में स्थित एक लोकप्रिय कैफे है, जो कॉन्टिनेंटल और नॉर्थ इंडियन व्यंजनों के लिए जाना जाता है। यह कैफे सुबह 8:30 बजे से खुलता है और स्थानीय लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है।
चंडीगढ़ के 'द विलो कैफे' में हुई इस गोलीबारी की घटना ने शहर में सनसनी फैला दी है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की उम्मीद है। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और उच्च अधिकारियों के परिवारों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े किए हैं।