Fri, 04 April 2025 09:54:15pm
साहित्य परिषद द्वारा आयोजित मासिक कार्यक्रम में तीन प्रमुख रचनाकारों ने अपनी सृजनशीलता का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. आखिलानंद पाठक ने साहित्य के माध्यम से समाज की चेतना को जागृत करने का संदेश दिया।
साहित्य का उद्देश्य: हमारी चेतना को जागृत करना
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आखिलानंद पाठक ने कहा, "साहित्य का कार्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी चेतना को जागृत करना है। जिस देश की चेतना जागृत होती है, वह समाज सभ्य और श्रेष्ठ कहलाता है।" उन्होंने यह भी कहा कि अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और अनुभूति को समष्टिगत बनाना ही साहित्यकार और साहित्य का श्रेष्ठ उद्देश्य है।
बीकानेर इकाई की आगामी योजनाएँ
साहित्य परिषद बीकानेर इकाई की अध्यक्ष डॉ. बसंती हर्ष ने घोषणा की कि परिषद विभिन्न विधाओं में सृजनरत रचनाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए शीघ्र ही कार्यक्रम आरंभ करेगी। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य है कि सभी रचनाकारों को एक मंच मिले, जहाँ वे अपनी कला और विचारों को साझा कर सकें।"
स्वागत उद्बोधन और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा
स्वागत उद्बोधन में राजाराम स्वर्णकार ने बीकानेर इकाई द्वारा आगामी कार्यक्रमों की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि परिषद साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करेगी, जिससे स्थानीय रचनाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा।
रचनाकारों की प्रस्तुति
♦ शिवशंकर शर्मा की कविताएँ
कवि शिवशंकर शर्मा ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा, "गुरु वही श्रेष्ठतम है, जिसकी शिक्षा से शिष्य चरित्रवान बन जाता है।" उन्होंने अपनी दूसरी रचना में भारत की गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया: "था कभी सोने की चिड़िया ये भारत देश हमारा, सारे ही विश्व पटल पर दबदबा कायम था हमारा।" नारी के संदर्भ में उन्होंने कहा, "हर रूप स्वरूप में रची बसी है नारी, हर देवी शक्ति नाम के विभिन्न रूपों में है नारी।" उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।
♦ जुगलकिशोर पुरोहित के गीत
गीतकार जुगलकिशोर पुरोहित ने मां शारदे की वंदना करते हुए प्रस्तुत किया: "है मां शारदे सुनो मेरी, हम तो तेरी शरण में आए हैं।" उन्होंने बृज की होली का वर्णन करते हुए गाया: "बृज में होली रहे, रंग गुलाल उड़े, होली खेलत है कृष्ण कन्हैया।" उनकी सस्वर प्रस्तुति ने श्रोताओं की तालियाँ बटोरीं।
♦ पम्मी कोचर की कर्तव्यबोध की रचनाएँ
पम्मी कोचर ने कर्तव्यबोध से ओतप्रोत रचनाएँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने कहा, "सब कुछ था मेरे पास, पर मैं अभाव में ही जीती रही।" एक माँ के रूप में उन्होंने व्यक्त किया, "एक माँ हूँ मैं, अपनी बेटी के लिए पूरा जहाँ हूँ मैं।" उनकी रचनाओं ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में मोहनलाल जांगिड़, असद अली, शकूर सिसोदिया, रमेशचंद्र महर्षि, कमलकिशोर पारीक, हिमांशु आचार्य, डॉ. जगदीशदान बारठ, चित्रकार योगेंद्रकुमार पुरोहित, शिव दाधीच जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे, जिन्होंने रचनाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।
संचालन और समापन
कार्यक्रम का संचालन राजाराम स्वर्णकार ने कुशलता से किया। उन्होंने रचनाकारों की भावनाओं को श्रोताओं तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समापन में सभी ने साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।