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श्रीशैलम सुरंग हादसा: लापता मजदूरों की तलाश जारी, नौसेना और रेलवे की संयुक्त मुहिम



अजय त्यागी 2025-03-01 10:02:14 तेलंगाना

श्रीशैलम सुरंग हादसा
श्रीशैलम सुरंग हादसा
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तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग के ध्वंस के बाद से आठ श्रमिकों की खोज जारी है। सात दिनों से 500 से अधिक बचाव दल अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ टीमों के साथ इन मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।

हादसे का विवरण और प्रारंभिक प्रतिक्रिया
22 फरवरी 2025 को एसएलबीसी सुरंग का एक हिस्सा ढह गया, जिससे आठ श्रमिक अंदर फंस गए। ये श्रमिक सुरंग के निर्माण कार्य में लगे थे जब अचानक यह दुर्घटना घटी। घटना के तुरंत बाद, राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सेना और नौसेना की टीमों को बचाव कार्य में लगाया।

बचाव कार्य में चुनौतियाँ और प्रगति
बचाव कार्य के दौरान, सुरंग बोरिंग मशीन (टीबीएम) के भारी धातु हिस्सों को हटाना प्रमुख चुनौती बन गया। टीबीएम, जो लगभग 140 मीटर लंबी और 1,500 टन वजनी है, मलबे में दबी हुई है। इसे काटने के लिए गैस कटर और प्लाज्मा कटर का उपयोग किया जा रहा है। साउथ सेंट्रल रेलवे (एससीआर) ने विशेष उपकरण, जैसे प्लाज्मा कटर और ब्रॉको कटिंग मशीन, के साथ अपनी टीमों को भेजा है ताकि धातु के मलबे को तेजी से हटाया जा सके। 

क्या कहते हैं मजदूरों के परिजन 
एक मज़दूर गुरप्रीत के चाचा ने कहा, "हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि क्या हो रहा है। हमने सुरंग के अंदर जाने की अनुमति मांगी, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। गाँव में हर कोई बहुत चिंतित है..."

मज़दूरों में से एक, संतोष साहू के बहनोई, श्रवण कुमार ने कहा, "...हमें अभी तक कोई जानकारी नहीं है कि वह सुरक्षित है या वहाँ कुछ बुरा हुआ है। हम इस उम्मीद के साथ यहाँ हैं कि वह सुरक्षित बाहर आ जाएगा। प्रशासन अच्छी तरह से काम कर रहा है..."

विशेषज्ञ टीमों की तैनाती और तकनीकी सहायता
बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) ने 200 कर्मियों को तैनात किया है। इसके अलावा, भारतीय रेलवे ने अपने विशेषज्ञों को उन्नत उपकरणों के साथ भेजा है ताकि भारी धातु के मलबे को काटकर हटाया जा सके। 

भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और सतह स्कैनिंग
राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (जीएसआई) के विशेषज्ञों ने दुर्घटना स्थल का हवाई और सतही सर्वेक्षण किया है। उनका उद्देश्य सुरंग के भीतर ध्वंस के सटीक स्थान की पहचान करना और संभावित रूप से फंसे हुए व्यक्तियों का पता लगाना है। इन सर्वेक्षणों से बचाव दल को मलबे को हटाने और श्रमिकों तक पहुंचने में सहायता मिल रही है।

मंत्री और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने बचाव कार्यों की दैनिक समीक्षा की है। उन्होंने विशेषज्ञों को वैकल्पिक तरीकों की खोज करने का निर्देश दिया है ताकि फंसे हुए श्रमिकों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रयास में लागत कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

भविष्य की चुनौतियाँ और सतर्कता
हालांकि बचाव दल दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सुरंग की जटिल संरचना और मलबे की मात्रा के कारण चुनौतियाँ बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबीएम के हिस्सों को धीरे-धीरे हटाकर ही श्रमिकों तक पहुंचना संभव है। इस प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन सभी एजेंसियाँ मिलकर प्रयास कर रही हैं कि जल्द से जल्द श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।