Fri, 04 April 2025 09:54:13pm
पंजाब में किसान आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां राज्य सरकार और किसान संगठनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, मुख्यमंत्री भगवंत मान और किसान नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद, कई किसान नेताओं को नजरबंद या हिरासत में लिया गया है। आइए, इस घटनाक्रम पर विस्तृत नज़र डालते हैं।
मुख्यमंत्री और किसान नेताओं की बैठक: असफल संवाद
3 मार्च 2025 को, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के 40 नेताओं ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य किसानों की 17 मांगों पर चर्चा करना था। हालांकि, बैठक के दौरान बहस बढ़ गई, जिससे नाराज होकर मुख्यमंत्री भगवंत मान बैठक छोड़कर चले गए। किसान नेता जोगिंदर सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पहली दफा किसी मुख्यमंत्री को ऐसा करते देखा गया, वे बैठक छोड़ चले गए।"
पुलिस की कार्रवाई: किसान नेताओं की नजरबंदी और गिरफ्तारी
बैठक के बाद, पंजाब पुलिस ने कई किसान नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर के अनुसार, विभिन्न किसान संगठनों के 35 वरिष्ठ नेताओं को या तो हिरासत में लिया गया है या नजरबंद किया गया है। कुल हिंद किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह मौलवीवाला को उनके घर में नजरबंद किया गया, जबकि किरती किसान यूनियन के ब्लॉक नेता दलजिंदर सिंह हरियाउ को गिरफ्तार किया गया है।
किसानों का आक्रोश: सरकार पर आरोप और विरोध प्रदर्शन
किसान नेताओं ने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सरवन सिंह पंढेर ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार दिल्ली चुनाव में हार का गुस्सा किसानों पर निकाल रही है। उन्होंने कहा, "पंजाब में लोग सरकार की नीतियों से किए वादों और नशे सहित भ्रष्टाचार से तंग हैं।" इसके अलावा, लुधियाना में किसानों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुतले जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: सरकार की आलोचना
पंजाब सरकार की इस कार्रवाई पर विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, "भगवंत मान की अगुवाई वाली सरकार ने पंजाब में इमरजेंसी जैसे हालात बना दिए हैं।" उन्होंने इसे किसान विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया। वहीं, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने की मांग की और कहा कि पंजाब को मानसिक रूप से स्थिर नेता की जरूरत है।
कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, "आम आदमी पार्टी का किसान विरोधी चेहरा फिर सामने आया। पंजाब में अपनी मांगों के लिए किसान चंडीगढ़ में प्रदर्शन करने वाले हैं। लेकिन उसके पहले ही कल रात किसानों के घरों पर रातभर छापेमारी और गिरफ्तारी हुईं। कल भी जब किसानों से बात चल ही रही थी तब अचानक गुस्से में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मीटिंग से “जो करना है कर लो” कह कर तमतमाते हुए निकल गए। उन्होंने तो पंजाब के किसानों को ही भला बुरा सुना दिया, उनको विकास में रोड़ा तक बुला दिया। इतना घमंड?"
#WATCH SAS नगर, पंजाब: किसान नेताओं के साथ बैठक पर दिए बयान पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "मैंने किसानों से कहा कि आप हर दिन 'रेल रोको', 'सड़क रोको' विरोध प्रदर्शन करते हैं...इससे पंजाब को काफी नुकसान हो रहा है। राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है। पंजाब 'धरना' का राज्य बनता जा… pic.twitter.com/KC8rrXdhbM
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 4, 2025
मुख्यमंत्री का बयान: धरनों पर नाराजगी
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों के लगातार धरनों पर नाराजगी जताते हुए कहा, "कभी रेल रोको, कभी सड़क रोको, कभी कुछ रोको। मेरी नरमाई को यह ना समझा जाए कि मैं एक्शन नहीं कर सकता। पंजाब धीरे-धीरे धरनों का राज्य बनता जा रहा है।"
किसानों की मांगें: समाधान की तलाश
किसान संगठनों ने अपनी 17 मांगों में से 13 पर सरकार से आश्वासन प्राप्त किया है, जिनमें किसानों के नाबार्ड ऋणों के लिए एकमुश्त निपटान योजना, बिजली बिल माफी, आवारा पशुओं से फसल नुकसान को रोकने के लिए राइफल लाइसेंस जारी करना, प्रीपेड बिजली मीटर लागू करने पर प्रतिबंध, और बाढ़ से हुए गन्ने की फसल के नुकसान का मुआवजा शामिल हैं। हालांकि, बाकी मांगों पर अभी भी समाधान की प्रतीक्षा है।
आने वाला प्रदर्शन: चंडीगढ़ में जुटेंगे किसान
इन घटनाओं के बीच, किसान संगठनों ने 5 मार्च को चंडीगढ़ में बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई है। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद, किसान नेता इस प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरवन सिंह पंढेर ने कहा, "किसान यूनियन की तरफ से मीटिंग की जाएगी और इसका विरोध किया जाएगा।"
समाधान की आवश्यकता
पंजाब में वर्तमान स्थिति तनावपूर्ण है, जहां सरकार और किसान संगठनों के बीच संवाद की कमी स्पष्ट है। दोनों पक्षों को मिलकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि राज्य में शांति और स्थिरता बनी रहे।
धरने प्रदर्शन से निकली आम आदमी पार्टी अब सत्ता में आकर अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करने वाले किसान नेताओं की आवाज दबाने के लिए उन्हें नजरबंद कर रही है। बीती रात किसान जत्थेबंदियों के कई नेताओं को भगवंत मान सरकार ने नजरबंद कर लिया है ताकि चंडीगढ़ में होने वाले प्रदर्शन को रोका जा… pic.twitter.com/lWtNrJd67C
— Virus Baba I.N.D.I.A Wala (@Virus_Studioz) March 4, 2025