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छात्राओं का भविष्य दांव पर: गूगल ट्रांसलेट से अनुवादित प्रश्नपत्र ने बढ़ाई मुश्किलें



अजय त्यागी 2025-03-05 09:34:36 मध्य प्रदेश

छात्राओं का आरोप : गूगल ट्रांसलेट से अनुवादित प्रश्नपत्र दिया गया
छात्राओं का आरोप : गूगल ट्रांसलेट से अनुवादित प्रश्नपत्र दिया गया
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एमपी बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। उर्दू माध्यम की छात्राओं को फिजिक्स का प्रश्नपत्र गूगल ट्रांसलेट के माध्यम से अनुवादित करके प्रदान किया गया, जिससे वे प्रश्नों को समझने में असमर्थ रहीं। इस घटना ने शिक्षा प्रणाली में अनुवाद की गुणवत्ता और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गूगल ट्रांसलेट से अनुवादित प्रश्नपत्र:
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बुरहानपुर के सेवा सदन स्कूल परीक्षा केंद्र में शासकीय उर्दू हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राएं फिजिक्स की परीक्षा देने पहुंचीं। उन्हें जो प्रश्नपत्र दिया गया, वह हिंदी से गूगल ट्रांसलेट के माध्यम से उर्दू में अनुवादित था। इसमें फिजिक्स के तकनीकी शब्दों का सही अनुवाद नहीं किया गया था, जिससे छात्राओं को प्रश्न समझने में कठिनाई हुई। 

छात्राओं की शिकायत और प्रशासन की प्रतिक्रिया:
रिपोर्ट के अनुसार प्रश्नपत्र की त्रुटियों को देखकर छात्राओं ने केंद्राध्यक्ष से उर्दू भाषा के फिजिक्स शिक्षक को बुलाने की मांग की। छात्राओं का आरोप है कि केंद्राध्यक्ष ने उनकी मांग को ठुकरा दिया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इससे नाराज होकर छात्राओं ने एसडीएम पल्लवी पुराणिक से शिकायत की और जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 

जिला शिक्षा अधिकारी का बयान:
रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) संतोष सिंह सोलंकी का कहना है कि बोर्ड परीक्षा में अलग से उर्दू शिक्षक उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों द्वारा किसी भी प्रकार के अभद्र व्यवहार की घटना नहीं हुई है। 

समाजसेवियों का समर्थन:
रिपोर्ट के अनुसार छात्राओं के समर्थन में समाजसेवी नौशाद अली अंसारी, उजै़र अंसारी और तनवीर रज़ा बरकती सहित अन्य लोग भी शामिल हुए। उन्होंने छात्राओं के साथ हुई इस अनदेखी के खिलाफ आवाज उठाई और प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग की। 

शिक्षा प्रणाली पर उठते सवाल:
इस घटना ने शिक्षा प्रणाली में अनुवाद की गुणवत्ता और परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गूगल ट्रांसलेट जैसे स्वचालित अनुवाद उपकरण तकनीकी शब्दावली का सटीक अनुवाद करने में सक्षम नहीं होते, जिससे छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह आवश्यक है कि प्रश्नपत्रों का अनुवाद विशेषज्ञों द्वारा किया जाए ताकि छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

भविष्य की दिशा:
इस घटना के बाद, यह आवश्यक हो जाता है कि शिक्षा विभाग अनुवाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनने और समाधान करने की व्यवस्था होनी चाहिए। छात्रों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार शिक्षा प्रणाली की प्राथमिकता होनी चाहिए।