Fri, 04 April 2025 09:55:34pm
राजस्थान विधानसभा के सत्र में मंगलवार को बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास ने कांग्रेस सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में बीकानेर, जिसे राजस्थान का शिक्षा केंद्र बनाने की योजना थी, लगातार उपेक्षा का शिकार हुआ।
उन्होंने कहा, "बीकानेर को शिक्षा का मुख्यालय बनाने का निर्णय ऐतिहासिक था, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने इसे योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया।"
विधायक के इन शब्दों ने विधानसभा में हलचल मचा दी। उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि बीकानेर की शिक्षा नीति में राजनीतिक हस्तक्षेप किस तरह नुकसानदेह साबित हुआ।
बीकानेर: शिक्षा का ऐतिहासिक केंद्र और सत्ता की अनदेखी
राज्य के एकीकरण के बाद यह तय किया गया था कि राजस्थान के शिक्षा विभाग का मुख्यालय बीकानेर में होगा। तत्कालीन महाराजा श्री शार्दूल सिंह ने शिक्षा निदेशालय के लिए मात्र एक रुपये प्रति माह किराए पर भवन उपलब्ध कराया, जहां आज भी निदेशालय कार्यरत है। पहले शिक्षा निदेशक के रूप में श्री मनमोहन को नियुक्त किया गया, जिन्होंने शिक्षा से जुड़ी अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उस समय यह तय किया गया था कि बीकानेर में ही प्राथमिक, माध्यमिक, संस्कृत और उच्च शिक्षा निदेशालय संचालित होंगे। लेकिन कांग्रेस ने धीरे-धीरे शिक्षा के इन केंद्रों को जयपुर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया, जिससे बीकानेर की शैक्षणिक व्यवस्था कमजोर होती चली गई।
बीकानेर से शिक्षा विभागों का विस्थापन: साजिश या प्रशासनिक निर्णय?
विधायक व्यास ने विधानसभा में खुलासा किया कि 1 जनवरी 1998 को प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशालयों को विभाजित कर अलग विभाग बना दिए गए। हालांकि, यह बदलाव शिक्षा में सुधार के लिए नहीं, बल्कि बीकानेर को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा था।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस सरकार ने शिक्षा निदेशालय को कमजोर करने की हरसंभव कोशिश की। बीकानेर से विभाग हटाकर जयपुर ले जाना उसी का हिस्सा था।"
व्यास का आरोप था कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही बीकानेर से प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय हटाने की पूरी कोशिश की, लेकिन स्थानीय विरोध के कारण वे ऐसा नहीं कर पाए।
कांग्रेस शासन में बिना संसाधनों के स्कूल खोलने की नाकाम कोशिशें
विधायक व्यास ने कांग्रेस सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने शिक्षा के नाम पर सिर्फ कागज़ी आदेश जारी किए, लेकिन उन स्कूलों को कोई सुविधाएं नहीं दी गईं।
उन्होंने कहा, "स्कूल खोले गए, लेकिन न शिक्षकों की नियुक्ति हुई और न ही छात्रों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। केवल आंकड़ों में बढ़ोतरी दिखाने के लिए यह दिखावा किया गया। कई स्कूल ऐसे इलाकों में खोल दिए गए जहां महज 10-20 घर थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा की आड़ में केवल राजनीति की गई।"
शिक्षा निदेशक की गैरमौजूदगी और अव्यवस्था
विधायक व्यास ने इस बात पर भी रोष व्यक्त किया कि कांग्रेस शासन में शिक्षा निदेशक कभी भी निदेशालय में उपस्थित नहीं होते थे।
उन्होंने कहा, "जब शिक्षा निदेशक ही अपने कार्यालय में नहीं बैठेंगे, तो शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कौन करेगा?"
वर्तमान सरकार के आने के बाद स्थितियां बदली हैं। अब निदेशक नियमित रूप से कार्यालय में मौजूद रहते हैं, जिससे शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों की परेशानियां कम हो रही हैं।
विद्यालयों की दुर्दशा और समाधान के लिए उठाई गई मांगें
विधायक व्यास ने विधानसभा में यह मांग रखी कि—
बिना संसाधनों के कॉलेज खोलने की अव्यवस्था
विधायक व्यास ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने बिना किसी ठोस योजना और संसाधनों के दो कॉलेज खोल दिए, जो बाद में छात्रों और प्रशासन के लिए सिरदर्द साबित हुए।
बीकानेर को शिक्षा का केंद्र बनाए रखने की मांग
विधायक व्यास ने सरकार से स्पष्ट मांग रखी कि—
विधायक व्यास ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, "बीकानेर को शिक्षा का केंद्र बनाने का जो सपना देखा गया था, उसे किसी भी कीमत पर पूरा किया जाएगा।"