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बिना उचित भर्ती प्रक्रिया के 20 वर्षों की सेवा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय



अजय त्यागी 2025-03-07 08:26:55 जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट - Photo : Internet
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट - Photo : Internet
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सरकारी विभागों में बिना उचित भर्ती प्रक्रिया के वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय का एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। इस फैसले में न्यायालय ने नियमितीकरण की मांग को खारिज करते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को मान्यता दी है।

मामला: 20 वर्षों की सेवा बिना नियमितीकरण
याचिकाकर्ता, जो डाक विभाग में एक सफाई कर्मचारी के रूप में दैनिक वेतनभोगी आधार पर नियुक्त थे, ने बिना नियमितीकरण या न्यूनतम वेतनमान के दो दशकों तक निरंतर सेवा की। उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), चंडीगढ़ बेंच के समक्ष नियमितीकरण और नियमित सफाई कर्मचारियों के समान वेतन की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद, उन्होंने श्रीनगर बेंच में अपील की, जहां उनकी याचिका पुनः अस्वीकृत हुई। अंततः, उन्होंने वर्तमान रिट याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

न्यायालय का दृष्टिकोण: नियमितीकरण पर विचार
न्यायमूर्ति संजीव कुमार और न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता की प्रारंभिक नियुक्ति बिना औपचारिक भर्ती प्रक्रिया के हुई थी, जिससे वे नियमितीकरण के पात्र नहीं थे। यह निर्णय संविधान पीठ के सचिव, कर्नाटक राज्य एवं अन्य बनाम उमादेवी एवं अन्य (2006) 4 SCC 1 मामले में दिए गए निर्णय के अनुरूप था, जिसमें बिना उचित भर्ती प्रक्रिया के नियुक्त कर्मचारियों के नियमितीकरण को अस्वीकार किया गया था।

समान कार्य के लिए समान वेतन: न्यायालय का निर्णय
हालांकि, न्यायालय ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने नियमित सफाई कर्मचारियों के समान कार्य किया है, इसलिए वे समान वेतन के हकदार हैं। यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के पंजाब राज्य एवं अन्य बनाम जगजीत सिंह एवं अन्य (2017) मामले में दिए गए फैसले पर आधारित था, जिसमें कहा गया था कि "समान वेतन के लिए, संबंधित कर्मचारियों को, जिनके साथ समानता की मांग की जा रही है, ऐसा कार्य करना चाहिए, जो कार्यात्मक रूप से समान होने के साथ-साथ, समान गुणवत्ता और संवेदनशीलता का हो।"

आदेश: समान वेतन और एरियर का भुगतान
न्यायालय ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, चंडीगढ़ बेंच के समक्ष आवेदन दायर करने की तिथि से नियमित कर्मचारियों के समान मूल वेतनमान दिया जाए। साथ ही, न्यायालय ने प्रतिवादियों को आदेश दिया कि वे इस निर्णय की प्रति प्राप्त होने की तिथि से दो महीने के भीतर याचिकाकर्ता को बकाया राशि का भुगतान करें।

यह निर्णय सरकारी विभागों में बिना उचित भर्ती प्रक्रिया के नियुक्त कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बिना उचित प्रक्रिया के नियुक्ति नियमितीकरण का अधिकार नहीं देती, लेकिन समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू होता है। यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और सरकारी विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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