Join our Whatsapp Group

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समाज का कड़वा सच: वॉकर में बैठी मिली नन्ही परी, अनाथालय के बाहर छोड़ गए निर्दयी



अजय त्यागी 2025-03-08 10:27:57 उत्तर प्रदेश

वॉकर में बैठी मिली नन्ही परी
वॉकर में बैठी मिली नन्ही परी
advertisement
advertisement

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले, जब पूरा विश्व महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात कर रहा है, आगरा में एक मासूम बच्ची को अनाथ आश्रम के बाहर छोड़ दिया गया। यह घटना समाज के उस कुरूप चेहरे को उजागर करती है, जहां बेटियों को बोझ समझा जाता है।

मासूम की स्थिति और प्रारंभिक देखभाल

बच्ची को वॉकर में बैठा पाया गया, उसके कपड़े एक पोटली में बांधकर रखे गए थे। आश्रम के चौकीदार अमर सिंह ने इस बात की जानकारी आश्रम प्रबंधन को दी, जिन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। बच्ची अपना नाम भी ठीक से नहीं बता पा रही थी और बोलने में असमर्थ थी। पुलिस ने उसे शाहगंज स्थित बालगृह में आश्रय दिलाया।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया

थाना रकाबगंज के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि रात 9 बजे पुलिस को सूचना मिली कि प्रेम धन आश्रम के गेट पर एक बच्ची मिली है। बच्ची चलने में भी असमर्थ लग रही थी। महिला पुलिसकर्मी बच्ची को गोद में उठाकर शाहगंज स्थित बालगृह ले आईं। बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने के बाद बच्ची को आश्रय दिलाया गया।

माता-पिता की पहचान की कोशिश

पुलिस अब बच्ची के माता-पिता की पहचान करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए आश्रम के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। बच्ची को इस तरह छोड़ने के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए परिजनों की पहचान आवश्यक है। संभावना है कि बच्ची के अस्वस्थ होने के कारण उसे छोड़ा गया हो।

समाज के लिए सवाल

यह घटना हमारे समाज के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक ओर हम बेटियों को लक्ष्मी का रूप मानते हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं हमारे दावों की पोल खोलती हैं। समाज को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाने और बेटियों के प्रति अपनी सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले हुई इस घटना ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम वास्तव में बेटियों को वह सम्मान और सुरक्षा दे पा रहे हैं, जिसकी वे हकदार हैं। क्या चंद आयोजनों, झूठी तारीफों ओर खोखले ढोल पीटना ही अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाना है? समाज को मिलकर ऐसे मामलों के खिलाफ आवाज उठानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई भी मासूम इस तरह की निर्दयता की शिकार न हो।