Fri, 04 April 2025 09:53:07pm
बीकानेर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (इगानप) के कर्मचारियों ने सरकार के एक फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश संयोजक भंवर पुरोहित के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारियों ने मुख्य अभियंता रवि सोलंकी का घेराव किया और सरकार के हालिया निर्णय का पुरजोर विरोध किया। यह आंदोलन उस पत्र को लेकर किया गया, जिसमें मंत्रालयिक कर्मचारियों के रिक्त पदों को एकीकृत ईआरसीपी (ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट) के दूसरे चरण के लिए आवंटित करने की बात कही गई थी।
वित्त विभाग के पत्र का विरोध क्यों?
वित्त विभाग द्वारा 19 फरवरी 2025 को जारी एक पत्र में मंत्रालयिक कर्मचारियों के रिक्त पदों की सूचना मांगी गई थी। इस सूचना का उद्देश्य भूमि अवाप्ति अधिकारी कार्यालय खोलने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति करना था। लेकिन कर्मचारियों का मानना है कि यह आदेश इंदिरा गांधी नहर परियोजना से संबंधित नहीं होना चाहिए।
कर्मचारियों का तर्क था कि इस तरह के फैसले से इगानप विभाग के कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और उनकी नौकरियों पर भी खतरा मंडराने लगेगा। उन्होंने सरकार से स्पष्ट स्पष्टीकरण और इस निर्णय को रद्द करने की मांग की।
मुख्य अभियंता रवि सोलंकी की सफाई
प्रदर्शन के दौरान, मुख्य अभियंता रवि सोलंकी ने आंदोलनकारी कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह पत्र इगानप विभाग के लिए नहीं है और सरकार को जल्द ही पत्र लिखकर इस विषय में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पद केवल जल संसाधन विभाग, जयपुर से संबंधित हैं, न कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना से।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख कर्मचारी नेता
इस आंदोलन में कई कर्मचारी संगठनों के नेता और सदस्य शामिल रहे। प्रमुख रूप से उपस्थित कर्मचारियों में शामिल थे:
महिला प्रदेशाध्यक्ष: सविता जोशी, महामंत्री: गुरविंदर सिंह, उपाध्यक्ष: अशोक रंगा, गुरमीत सिंह, कानसिंह सहित अन्य प्रमुख सदस्य: ईश्वर सिंह, टीनकेश शर्मा, गोविंद सिंह, अशोक घर्ट, राजूपाल, सुखदेव सिंह, रविंद्र सिंह, आर.पी. चौधरी, कार्तिक गोस्वामी, लक्ष्मण चौधरी, धीरज पुरोहित, भंवर सिंह, संदीप पाल, राजेंद्र चौहान, श्रवण गहलोत, भवानी सिंह, तरुण सिंह, अमजद खान तंवर।
इन सभी ने एकजुट होकर सरकार के निर्णय का विरोध किया और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा।
कर्मचारियों की मांग और सरकार की अगली रणनीति
इस घेराव के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के सामने कुछ स्पष्ट मांगें रखीं:
मुख्य अभियंता के बयान के बाद भी कर्मचारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। वे सरकार के औपचारिक पत्र का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द ही इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
क्या सरकार झुकेगी या होगा बड़ा आंदोलन?
इस विरोध प्रदर्शन से सरकार पर जबरदस्त दबाव बन गया है। कर्मचारी अपने हक के लिए सड़कों पर उतर चुके हैं और उनका कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी हड़ताल में बदल सकता है।
अब देखना यह होगा कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या नहीं। फिलहाल, बीकानेर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर है और वे अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना के कर्मचारियों ने अपनी एकता और ताकत का परिचय देते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि वे अपने हक की लड़ाई में कोई समझौता नहीं करेंगे। सरकार के फैसले से हजारों कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है और यही कारण है कि यह मुद्दा इतना संवेदनशील हो गया है।
बहरहाल, अब सरकार का अगला कदम क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना तो तय है कि यदि सरकार जल्द ही इस विषय में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तो कर्मचारियों का यह आंदोलन और उग्र हो सकता है।