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अद्भुत आविष्कार: भारत में बनेगी स्वदेशी एयर टैक्सी, गुंटूर के चावा अभिराम की एयर टैक्सी से उड़ान भरें



अजय त्यागी 2025-03-20 03:56:19 आंध्र प्रदेश

चावा अभिराम की एयर टैक्सी
चावा अभिराम की एयर टैक्सी
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कल्पना कीजिए, जब आप ट्रैफिक जाम में फंसे हों और अचानक आपके पास एक विकल्प हो—हवा में उड़ते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचने का। यह सपना अब हकीकत बनने जा रहा है, और इसके पीछे हैं आंध्र प्रदेश के गुंटूर के एक युवा उद्यमी, चावा अभिराम, जिन्होंने एयर टैक्सी के क्षेत्र में क्रांति लाने की ठानी है।

चावा अभिराम: एक युवा वैज्ञानिक की उड़ान

गुंटूर के निवासी चावा अभिराम ने अमेरिका में रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। विदेश में उच्च शिक्षा के बावजूद, उन्होंने अपने देश में कुछ नया करने का संकल्प लिया। भारतीय शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम को देखते हुए, उन्होंने एयर टैक्सी का विचार विकसित किया। 2019 में, उन्होंने मैग्नम विंग्स की स्थापना की, जो गुंटूर के नल्लाचेरुवु में स्थित है, जहां उन्होंने एक छोटे एयर टैक्सी का प्रोटोटाइप सफलतापूर्वक बनाया।

एयर टैक्सी का सफल परीक्षण

मैग्नम विंग्स द्वारा विकसित दो-सीटर एयर टैक्सी ने 40 किलोमीटर की अधिकतम दूरी और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की शीर्ष गति के साथ 1,000 फीट की ऊंचाई पर सफल परीक्षण किया है। यह वाहन रिमोटली ऑपरेटेड था, लेकिन डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के नियमों के अनुसार, बिना पायलट के वाहनों की अनुमति नहीं है। इसलिए, मैग्नम विंग्स अब पायलट सहित दो और तीन सीटों वाले एयर टैक्सी विकसित कर रहा है।

स्वदेशी उत्पादन: आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

इस परियोजना की खास बात यह है कि मोटर को छोड़कर सभी उपकरण आंध्र प्रदेश में ही निर्मित किए जा रहे हैं। यह स्वदेशी उत्पादन न केवल भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि स्थानीय उद्योगों को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

एयर टैक्सी: भविष्य की सवारी

एयर टैक्सी का विचार केवल ट्रैफिक जाम से मुक्ति ही नहीं, बल्कि समय की बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जिससे पर्यावरण को लाभ होगा।

चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएँ

हालांकि तकनीकी और नियामक चुनौतियाँ हैं, लेकिन चावा अभिराम का यह प्रयास भारत में एयर मोबिलिटी के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख सकता है। यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मिसाल कायम करेगी।

चावा अभिराम की यह पहल साबित करती है कि यदि जुनून और समर्पण हो, तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। उनकी एयर टैक्सी परियोजना न केवल भारत के तकनीकी विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी।