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पीपल फॉर एनिमल्स का ऐतिहासिक प्रयास: गौरैया संरक्षण की प्रेरणा दायक पहल, बच्चों में बांटे घोंसले



अजय त्यागी 2025-03-20 08:33:11 राजस्थान

गौरैया संरक्षण की प्रेरणा दायक पहल
गौरैया संरक्षण की प्रेरणा दायक पहल
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बढ़ते शहरीकरण और तकनीकी विकास के इस दौर में, हमारे आसपास की नन्ही गौरैया पक्षी की चहचहाहट कहीं खो सी गई है। संरक्षण के अभाव में यह प्यारा पक्षी लुप्तता के कगार पर है। ऐसे में, पीपल फॉर एनिमल्स एवं वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने एक अनोखी पहल की है, जो न केवल सराहनीय है, बल्कि प्रेरणादायक भी है।

विद्यालय में घोंसलों का वितरण

विश्व गौरैया संरक्षण दिवस के अवसर पर, सेठ मुरलीधर मानसिंहका बालिका विद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पीपल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी एवं पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने बच्चों को गौरैया के घोंसले वितरित किए। उनका मानना है कि बड़े पेड़ों की कमी, बढ़ता शहरीकरण, फैलते तारों के जाल एवं मोबाइल टावरों की बढ़ती संख्या से प्रदूषण और तापमान में वृद्धि हुई है, जिससे गौरैया को घोंसले बनाने की जगह नहीं मिलती और उनका प्रजनन प्रभावित होता है। साथ ही, पेस्टीसाइड्स के प्रयोग से गौरैया का भोजन, जैसे कीट और कीड़े, नष्ट हो जाते हैं, जिससे इनकी संख्या में निरंतर कमी हो रही है। 

बच्चों की भूमिका

पीएफए महासचिव गुमान सिंह पीपाड़ा ने बच्चों से गौरैया संरक्षण के लिए घोंसला लगाने की अपील की। उन्होंने बताया कि छोटे-छोटे प्रयासों से हम इस पक्षी की संख्या में वृद्धि कर सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते है। 

विद्यालय के शिक्षकों का योगदान

इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिका रानी तंबोली, निधि यादव और सांवलमल ओझा ने भी गौरैया संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में घोंसले लगाएं, ताकि गौरैया को सुरक्षित आवास मिल सके। 

शहरीकरण का प्रभाव

बढ़ते शहरीकरण और फैलते तारों के जाल ने गौरैया के प्राकृतिक आवास को प्रभावित किया है। बड़े पेड़ों की कटाई और कंक्रीट के जंगलों ने इनके घोंसले बनाने की जगह छीन ली है। मोबाइल टावरों की बढ़ती संख्या से उत्पन्न विकिरण ने भी इनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। 

रासायनिक प्रदूषण का खतरा

खेती में पेस्टीसाइड्स के बढ़ते उपयोग से गौरैया का भोजन स्रोत, जैसे कीट और कीड़े, नष्ट हो रहे हैं। इससे उनकी भोजन श्रृंखला बाधित हो रही है, जो उनकी संख्या में गिरावट का एक प्रमुख कारण है। 

सामूहिक प्रयास की आवश्यकता

गौरैया संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर बच्चों, को इस दिशा में कदम बढ़ाना होगा। घरों में घोंसले लगाना, पेड़ों का संरक्षण, और रासायनिक पदार्थों के उपयोग में कमी लाना ऐसे कुछ कदम हैं, जो गौरैया की संख्या बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

पीपल फॉर एनिमल्स एवं वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो द्वारा की गई यह पहल सराहनीय है। बच्चों में जागरूकता फैलाकर और उन्हें घोंसले वितरित करके, उन्होंने गौरैया संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हमें भी इस प्रयास में शामिल होकर, इस नन्ही चहचहाती पक्षी की मधुर ध्वनि को पुनः अपने आंगन में सुनने का प्रयास करना चाहिए।