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बीकानेर की पाना देवी- 93 की उम्र में जीते 3 स्वर्ण पदक, स्वीडन और इंडोनेशिया में भारत का करेंगी प्रतिनिधित्व 



अजय त्यागी 2025-03-21 11:17:13 स्थानीय

बीकानेर की पाना देवी- 93 की उम्र में जीते 3 स्वर्ण पदक
बीकानेर की पाना देवी- 93 की उम्र में जीते 3 स्वर्ण पदक
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उम्र महज एक संख्या है, यह कहावत बीकानेर की 93 वर्षीय एथलीट पाना देवी गोदारा ने सच कर दिखाया है। हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित 45 वीं नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पाना देवी ने शॉट पुट, 100 मीटर दौड़ और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गर्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी अदम्य इच्छाशक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह साबित करती है कि समर्पण और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

बेंगलुरु में स्वर्णिम प्रदर्शन

बेंगलुरु में आयोजित 45 वीं नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पाना देवी ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया। 93 वर्ष की आयु में भी उन्होंने शॉट पुट, 100 मीटर दौड़ और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीते। यह उपलब्धि उनकी अटूट मेहनत और समर्पण का परिणाम है, जो उन्होंने वर्षों से अपनी फिटनेस और खेल के प्रति दिखाया है।

आगामी विश्व चैंपियनशिप की तैयारी

पाना देवी का अगला लक्ष्य इस अगस्त में स्वीडन में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतना है। इसके लिए वे कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ तैयारी कर रही हैं। उन्होंने अपनी आगामी प्रतियोगिताओं को लेकर उत्साह व्यक्त किया है और कहा है कि वे स्वीडन और इंडोनेशिया में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए बेहद उत्साहित हैं।

एशियन मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चयन

पाना देवी को सितंबर में इंडोनेशिया में होने वाली एशियन मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। यह चयन उनकी निरंतर मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है। वे इस प्रतियोगिता में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

दैनिक जीवन और फिटनेस रूटीन

बीकानेर के चौधरी कॉलोनी की निवासी पाना देवी अपने एथलेटिक्स के जुनून को दैनिक जिम्मेदारियों के साथ बखूबी निभाती हैं। वे प्रतिदिन अपने घर के कार्यों के साथ-साथ गाय और भैंसों की देखभाल करती हैं। उनका सख्त फिटनेस रूटीन उनकी असाधारण सफलता का मुख्य कारण है। उनका अनुशासित जीवन और अथक परिश्रम उनकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रेरणा का स्रोत

इस उम्र में पदक जीतना पाना देवी के लिए एक बड़ी सफलता है, लेकिन यह सभी के लिए, विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक प्रेरणा भी है। उनका संदेश है कि महिलाएं और पुरुष फिटनेस पर ध्यान दें और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि उम्र चाहे जो भी हो, अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।

93 वर्ष की आयु में, पाना देवी दृढ़ता और संकल्प की प्रतीक हैं, यह साबित करते हुए कि उम्र सपनों का पीछा करने में बाधा नहीं है। यह उपलब्धि न केवल बीकानेर के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है, और पाना देवी की कहानी कई लोगों को प्रेरित करती है।